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गोरखमुण्डी – Gorakhmundi

गोरखमुण्डी

Gorakhmundi

Sphaeranthus indicus · Asteraceae (भृंगराज कुल)

संस्कृत नाम: मुण्डी, श्रावणी, भिक्षु

जड़ी-बूटीनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागपूरा पौधा, फूल के गोले
तासीरगर्म
धूपपूरी धूप
पानीज़्यादा — मिट्टी नम रखें
लगाने का समयअक्टूबर, नवंबर

संक्षेप में: स्वाद में तीखा-चरपरा, कड़वा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹100छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

गोरखमुण्डी सर्दियों में सूखते धान के खेतों में उगने वाला छोटा, सुगंधित पौधा है, जिस पर बैंगनी-गुलाबी, गोल, सिर जैसे (मुण्डी) फूल लगते हैं। पूरे पौधे से तेज़ खुशबू आती है। आयुर्वेद में यह खून साफ़ करने और त्वचा रोगों की प्रसिद्ध औषधि है।

पारंपरिक उपयोग

  1. गोरखमुण्डी का चूर्ण या अर्क खून साफ़ करने और फोड़े-फुंसी, खुजली में पारंपरिक रूप से लिया जाता है।
  2. ग्रंथि (गिल्टी) की सूजन में आयुर्वेदिक योगों में।
  3. आँखों और पेशाब की तकलीफ़ में लोक-परंपरा में।
  4. बुखार और भूख न लगने में।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
कटु (तीखा-चरपरा), तिक्त (कड़वा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
कफ और वात को शांत करती है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

नम, धूप वाली जगह; धान के खेत जैसी मिट्टी। अक्टूबर–नवंबर में बीज छिड़कें।

शब्दावली

कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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