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तगर (सुगंधबाला) – Tagar (Indian Valerian)

तगर (सुगंधबाला)

Tagar (Indian Valerian)

Valeriana jatamansi (V. wallichii) · Caprifoliaceae

संस्कृत नाम: तगर, नत, कुटिल

जड़ी-बूटी
उपयोगी भागजड़ और प्रकंद
तासीरगर्म

संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, तीखा-चरपरा, कसैला, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

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परिचय

असली तगर हिमालय में उगने वाला, दिल के आकार के पत्तों और गुलाबी-सफ़ेद फूलों के गुच्छों वाला छोटा पौधा है। इसकी जड़ से तेज़, अलग तरह की गंध आती है। आयुर्वेद में यह नींद और मानसिक शांति की औषधि है। (बगीचे में 'तगर' कहलाने वाली चाँदनी झाड़ी अलग पौधा है।)

पारंपरिक उपयोग

  1. जड़ का चूर्ण अनिद्रा, बेचैनी और तनाव में आयुर्वेद में प्रयोग होता है।
  2. सिरदर्द और नसों के दर्द के योगों में।
  3. जड़ से इत्र और धूप बनती है।
  4. मिर्गी जैसे दौरों के पुराने योगों में (केवल वैद्य द्वारा)।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
तिक्त (कड़वा), कटु (तीखा-चरपरा), कषाय (कसैला)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), स्निग्ध (चिकनाई वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
कफ और वात को शांत करता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

ठंडी, छायादार, नम पहाड़ी जगह का पौधा; बिहार के मैदान में गर्मी में बचाना कठिन है। सर्दियों में छाँव में गमले में रख सकते हैं।

ध्यान दें

नींद की दवा या शराब के साथ न लें। गर्भावस्था में न लें।

शब्दावली

कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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