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कासमर्द (कसौंदी) – Kasamard (Coffee Senna)

कासमर्द (कसौंदी)

Kasamard (Coffee Senna)

Senna occidentalis (Cassia occidentalis) · Fabaceae (शिम्बी कुल)

संस्कृत नाम: कासमर्द, अरिमर्द, कासारि

जड़ी-बूटीविशेष सावधानी
उपयोगी भागपत्ते, जड़, बीज (भुने हुए)
तासीरगर्म

संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, मीठा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है — यह विशेष सावधानी वाला पौधा है; इसका सेवन केवल वैद्य की देखरेख में करें।

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परिचय

कसौंदी बरसात में उगने वाला 1 मीटर तक का पौधा है, जिस पर पीले फूल और लंबी पतली फलियाँ लगती हैं। संस्कृत नाम 'कासमर्द' का अर्थ है खाँसी को दबाने वाला। पुराने समय में इसके भुने बीज कॉफ़ी की जगह पिए जाते थे।

पारंपरिक उपयोग

  1. पत्तों का काढ़ा खाँसी, कफ और दमा में आयुर्वेद में प्रयोग होता है।
  2. पत्तों का लेप दाद, खुजली और त्वचा रोगों में।
  3. पत्तों की सब्ज़ी देहात में कभी-कभी बनाई जाती है।
  4. जड़ का प्रयोग बुखार में लोक-परंपरा में।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
तिक्त (कड़वा), मधुर (मीठा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
कफ और वात को शांत करता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

अपने आप उगने वाला पौधा; धूप और किसी भी मिट्टी में बरसात में।

ध्यान दें

कच्चे बीज खाने योग्य नहीं हैं — बच्चों में गंभीर बीमारी (मांसपेशियों और लिवर पर असर) के मामले सामने आए हैं। बीज कभी न खाएँ।

शब्दावली

कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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