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अपराजिता – Aparajita (Butterfly Pea)

अपराजिता

Aparajita (Butterfly Pea)

Clitoria ternatea · Fabaceae (शिम्बी कुल)

संस्कृत नाम: अपराजिता, विष्णुक्रान्ता, गिरिकर्णी

लता / बेलनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागजड़, बीज, पत्ते, फूल
तासीरठंडी
धूपपूरी धूप
पानीमध्यम — ऊपर की मिट्टी सूखने पर

संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, कसैला, तासीर ठंडी। वात, पित्त और कफ — तीनों को संतुलित रखने वाली।

₹100छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

अपराजिता एक पतली, तेज़ी से बढ़ने वाली बेल है, जिस पर गहरे नीले (कभी सफ़ेद) शंख जैसे फूल लगते हैं। पूजा में नीले फूल भगवान विष्णु और शनिदेव को चढ़ाए जाते हैं। आयुर्वेद में इसे मेध्य (बुद्धि बढ़ाने वाली) औषधियों में गिना जाता है।

पारंपरिक उपयोग

  1. जड़ और पत्तों को आयुर्वेद में याददाश्त और मानसिक शांति के लिए (मेध्य रसायन) उपयोग किया गया है।
  2. नीले फूलों से बनी 'ब्लू टी' आजकल लोकप्रिय है; नींबू डालने पर इसका रंग बैंगनी हो जाता है।
  3. जड़ का लेप सूजन और गले की ख़राश में पारंपरिक रूप से लगाया जाता है।
  4. बीज तेज़ जुलाब (विरेचन) का काम करते हैं, इसलिए केवल वैद्य की देखरेख में।
  5. फलीदार पौधा होने से मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाता है।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
तिक्त (कड़वा), कषाय (कसैला)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
ठंडी
दोषों पर असर
तीनों दोषों को शांत करने वाली मानी जाती है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

जाली, बाड़ या खिड़की की ग्रिल पर आसानी से चढ़ती है। धूप या हल्की छाँव, सामान्य पानी। बरसात में बीज या पौधा लगाएँ; गर्मी से सर्दी तक फूल देती है।

ध्यान दें

बीज जुलाब वाले हैं; गर्भावस्था में अंदरूनी सेवन न करें।

शब्दावली

मेध्य
दिमाग़, याददाश्त और समझ बढ़ाने वाली
रसायन
शरीर को ताक़त देने, रोगों से बचाने और बुढ़ापा धीमा करने वाली औषधि
विरेचन
दस्त कराकर पेट साफ़ करना (जुलाब)
वात · पित्त · कफ
शरीर की तीन मूल शक्तियाँ — वात, पित्त और कफ; इनका संतुलन बिगड़ने पर रोग होते हैं। वात = गैस, दर्द, रूखापन; पित्त = जलन, एसिडिटी, गर्मी; कफ = बलगम, सर्दी-खाँसी, भारीपन।

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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