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पान – Paan (Betel Leaf)

पान

Paan (Betel Leaf)

Piper betle · Piperaceae (पिप्पली कुल)

संस्कृत नाम: ताम्बूलवल्ली, नागवल्ली

लता / बेलनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागपत्ते, जड़
तासीरगर्म
धूपहल्की धूप या आधी छाँव
पानीज़्यादा — मिट्टी नम रखें
लगाने का समयजून, जुलाई, अगस्त

संक्षेप में: स्वाद में तीखा-चरपरा, कड़वा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹55छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

पान दिल के आकार के चमकीले, सुगंधित पत्तों वाली बेल है। भोजन के बाद पान खाना, पूजा में पान का पत्ता चढ़ाना और मेहमान को पान देना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। बिहार का मगही पान अपनी कोमलता और स्वाद के लिए GI टैग पा चुका है।

पारंपरिक उपयोग

  1. भोजन के बाद सादा पान (बिना तंबाकू-सुपारी के) पाचन और मुँह की ताज़गी के लिए खाया जाता है।
  2. सरसों के तेल में गरम किया पान का पत्ता छाती पर रखने से बच्चों की खाँसी-जकड़न में आराम की लोक-परंपरा है।
  3. पत्ते का रस और शहद खाँसी में घरेलू उपाय के रूप में दिया जाता है।
  4. पूजा, कलश स्थापना और शुभ कार्यों में पान का पत्ता अनिवार्य है।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
कटु (तीखा-चरपरा), तिक्त (कड़वा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), तीक्ष्ण (तेज़ असर वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
कफ और वात को शांत करता है, पित्त बढ़ाता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

हल्की छाँव, नमी और नम पर अच्छी निकासी वाली मिट्टी; तेज़ धूप और लू से बचाएँ। बरसात में तने की कलम लगाएँ; दीवार, जाली या डंडे पर चढ़ाएँ। गमले में भी अच्छा बढ़ता है।

ध्यान दें

पान के साथ तंबाकू, गुटखा या ज़्यादा सुपारी खाने से मुँह का कैंसर होता है — सादा पान ही लें।

शब्दावली

कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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