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करेला – Bitter Gourd

करेला

Bitter Gourd

Momordica charantia · Cucurbitaceae (कूष्माण्ड कुल)

संस्कृत नाम: कारवेल्ल, सुषवी

लता / बेलनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागफल, पत्ते, बीज
तासीरगर्म
धूपपूरी धूप
पानीमध्यम — ऊपर की मिट्टी सूखने पर
लगाने का समयफ़रवरी, मार्च, जून, जुलाई

संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, तीखा-चरपरा, तासीर गर्म। जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹50छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

करेला कड़वे स्वाद वाली बेलदार सब्ज़ी है, जिसके पीले फूल और काँटेदार-उभार वाले हरे फल होते हैं। कड़वा होने के कारण आयुर्वेद में इसे खून साफ़ करने वाला और भूख बढ़ाने वाला माना गया है। बिहार में भरवाँ करेला और करेले की भुजिया बहुत लोकप्रिय है।

पारंपरिक उपयोग

  1. करेले की सब्ज़ी और रस का प्रयोग खून में शुगर संतुलित रखने के लिए परंपरा में किया जाता है (दवा के साथ, डॉक्टर की सलाह से)।
  2. पेट के कीड़ों में करेले के पत्तों का रस लोक-परंपरा में दिया जाता है।
  3. कड़वा होने से भूख बढ़ाता है और पाचन सुधारता है।
  4. त्वचा के फोड़े-फुंसी और खुजली में खून साफ़ करने के लिए खाया जाता है।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
तिक्त (कड़वा), कटु (तीखा-चरपरा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
गर्म (कुछ ग्रंथों में ठंडी)
दोषों पर असर
कफ और पित्त को शांत करता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

पूरी धूप और जाली/मचान का सहारा चाहिए। फरवरी–मार्च और जून–जुलाई में बीज बोएँ; 55–60 दिन में फल आने लगते हैं।

ध्यान दें

शुगर की दवा के साथ करेले का रस ज़्यादा लेने से शुगर बहुत कम हो सकती है। गर्भावस्था में रस और बीज न लें।

शब्दावली

कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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