
अनार
Pomegranate
Punica granatum · Lythraceae
संस्कृत नाम: दाडिम
संक्षेप में: स्वाद में मीठा, कसैला, खट्टा, तासीर सामान्य। वात, पित्त और कफ — तीनों को संतुलित रखने वाली।
किस्में: अनार (भगवा) ₹150 · अनार (बेदाना) ₹150
डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क
परिचय
अनार 3–5 मीटर ऊँचा झाड़ीनुमा पेड़ है, जिसके लाल-नारंगी फूल और लाल दानों वाले फल होते हैं। आयुर्वेद में मीठे अनार को हृदय के लिए हितकारी और कमज़ोरी दूर करने वाला फल माना गया है। इसके फल का छिलका और फूल भी दवा में काम आते हैं।
पारंपरिक उपयोग
- अनार का रस बीमारी के बाद कमज़ोरी, खून की कमी और भूख न लगने में दिया जाता है।
- सूखे छिलके का काढ़ा दस्त और पेचिश में पारंपरिक रूप से इस्तेमाल होता है, क्योंकि यह कसैला (ग्राही) है।
- छिलके का चूर्ण मसूड़ों और मुँह के छालों पर मंजन की तरह लगाया जाता है।
- अनारदाना (सूखे खट्टे दाने) चटनी और चूर्ण में पाचन के लिए डाला जाता है।
- फूलों का रस नाक से खून आने (नकसीर) में लोक-परंपरा में दिया जाता है।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- मधुर (मीठा), कषाय (कसैला), अम्ल (खट्टा)
- गुण (प्रकृति)
- लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), स्निग्ध (चिकनाई वाला)
- तासीर
- सामान्य (न ज़्यादा गर्म, न ठंडी)
- दोषों पर असर
- मीठा अनार तीनों दोषों को संतुलित करता है; खट्टा अनार वात-कफ शामक है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप और अच्छी निकासी वाली मिट्टी चाहिए। बिहार में फरवरी–मार्च या जुलाई–अगस्त में लगाएँ। पानी नियमित पर कम दें; फल बनते समय पानी की अनियमितता से फल फटते हैं। बड़े गमले में भी फल देता है।
ध्यान दें
छाल और जड़ का काढ़ा तेज़ असर वाला है, इसे वैद्य की सलाह के बिना न लें।
शब्दावली
- ग्राही
- दस्त रोकने वाली (मल बाँधने वाली)
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
- कफ
- शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





