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ब्राह्मी – Brahmi

ब्राह्मी

Brahmi

Bacopa monnieri · Plantaginaceae

संस्कृत नाम: ब्राह्मी, सरस्वती, जलनिम्ब

जड़ी-बूटीनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागपूरा पौधा (पंचांग)
तासीरठंडी
धूपहल्की धूप या आधी छाँव
पानीज़्यादा — मिट्टी नम रखें

संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, कसैला, मीठा, तासीर ठंडी। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹60छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

ब्राह्मी नमी वाली जगह पर ज़मीन पर फैलने वाली, छोटे मोटे पत्तों और सफ़ेद-हल्के बैंगनी फूलों वाली जड़ी है। इसका नाम ब्रह्मा और सरस्वती से जुड़ा है, क्योंकि आयुर्वेद में यह बुद्धि, याददाश्त और एकाग्रता की सबसे प्रसिद्ध (मेध्य) औषधि है। (कुछ जगह मण्डूकपर्णी/सेंटेला को भी ब्राह्मी कहते हैं, जो अलग पौधा है।)

पारंपरिक उपयोग

  1. ब्राह्मी का रस या चूर्ण पढ़ने वाले बच्चों और बुज़ुर्गों में याददाश्त के लिए परंपरा से दिया जाता है।
  2. तनाव, बेचैनी और अनिद्रा में मन शांत करने के लिए इसका प्रयोग होता है।
  3. ब्राह्मी तेल सिर की मालिश, बालों और ठंडक के लिए लगाया जाता है।
  4. आवाज़ साफ़ करने और गले के लिए भी इसका प्रयोग बताया गया है।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
तिक्त (कड़वा), कषाय (कसैला), मधुर (मीठा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला)
तासीर
ठंडी
दोषों पर असर
कफ और वात को शांत करती है, पित्त भी संतुलित करती है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

धूप या हल्की छाँव और हमेशा गीली मिट्टी — बिना छेद वाले टब, तालाब के किनारे या ट्रे में पानी भरकर रखें। किसी भी मौसम में कलम से लग जाती है; बहुत तेज़ी से फैलती है।

ध्यान दें

थायरॉइड की दवा या नींद की दवा के साथ डॉक्टर से पूछकर लें; कुछ लोगों को पेट में गड़बड़ होती है।

शब्दावली

मेध्य
दिमाग़, याददाश्त और समझ बढ़ाने वाली
कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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