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मकोय – Makoy (Black Nightshade)

मकोय

Makoy (Black Nightshade)

Solanum nigrum · Solanaceae (कंटकारी कुल)

संस्कृत नाम: काकमाची, वायसी

जड़ी-बूटीविशेष सावधानी
उपयोगी भागपत्ते, पके फल, पूरा पौधा
तासीरगर्म

संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, तासीर गर्म। वात, पित्त और कफ — तीनों को संतुलित रखने वाली — यह विशेष सावधानी वाला पौधा है; इसका सेवन केवल वैद्य की देखरेख में करें।

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परिचय

मकोय बरसात-सर्दी में अपने आप उगने वाला छोटा पौधा है, जिस पर छोटे सफ़ेद फूल और मटर जैसे हरे फल लगते हैं, जो पककर काले (कभी लाल-नारंगी) हो जाते हैं। आयुर्वेद में यह लिवर और सूजन की औषधि है; 'मकोय अर्क' यूनानी में प्रसिद्ध है।

पारंपरिक उपयोग

  1. पत्तों का रस या मकोय अर्क लिवर की कमज़ोरी और सूजन में पारंपरिक रूप से लिया जाता है।
  2. पत्तों का काढ़ा बुखार और मुँह के छालों में।
  3. पत्तों का लेप सूजन और जलन पर।
  4. पकाए हुए पत्ते दक्षिण भारत में साग के रूप में खाए जाते हैं।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
तिक्त (कड़वा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), स्निग्ध (चिकनाई वाला)
तासीर
गर्म (कुछ ग्रंथों में ठंडी)
दोषों पर असर
तीनों दोषों को शांत करती है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

अपने आप उगने वाला पौधा; धूप या हल्की छाँव, नम मिट्टी।

ध्यान दें

कच्चे हरे फल खाने योग्य नहीं हैं — केवल पूरी तरह पके फल ही, वह भी थोड़े। बच्चों को कच्चे फल से दूर रखें।

शब्दावली

वात · पित्त · कफ
शरीर की तीन मूल शक्तियाँ — वात, पित्त और कफ; इनका संतुलन बिगड़ने पर रोग होते हैं। वात = गैस, दर्द, रूखापन; पित्त = जलन, एसिडिटी, गर्मी; कफ = बलगम, सर्दी-खाँसी, भारीपन।

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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