PARIJATNURSERY & GARDEN
Home › आयुर्वेदिक पौधे › भुई आँवला
भुई आँवला – Bhui Amla

भुई आँवला

Bhui Amla

Phyllanthus niruri / P. fraternus · Phyllanthaceae

संस्कृत नाम: भूम्यामलकी, तामलकी

जड़ी-बूटीनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागपूरा पौधा (पंचांग)
तासीरठंडी
धूपहल्की धूप या आधी छाँव
पानीमध्यम — ऊपर की मिट्टी सूखने पर
लगाने का समयजून, जुलाई

संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, कसैला, मीठा, तासीर ठंडी। जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹100छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

भुई आँवला बरसात में खेत-आँगन में उग आने वाला 20–40 सेमी का छोटा पौधा है, जिसके पत्तों के नीचे की ओर आँवले जैसे छोटे-छोटे दाने लाइन में लगे होते हैं — इसीलिए नाम 'ज़मीन का आँवला'। आयुर्वेद में यह लिवर और पीलिया की प्रसिद्ध औषधि है।

पारंपरिक उपयोग

  1. पूरे पौधे का रस या काढ़ा पीलिया और लिवर की कमज़ोरी में पारंपरिक रूप से दिया जाता है (जाँच और इलाज डॉक्टर से कराएँ)।
  2. पेशाब की जलन और पथरी में लोक-परंपरा में प्रयोग।
  3. भूख बढ़ाने और पाचन के लिए।
  4. त्वचा के घाव और खुजली पर लेप।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
तिक्त (कड़वा), कषाय (कसैला), मधुर (मीठा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
ठंडी
दोषों पर असर
कफ और पित्त को शांत करता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

बरसात में अपने आप उग आता है; धूप-छाँव, नम मिट्टी। बीज छिड़क दें, 2–3 महीने में पूरा पौधा तैयार।

ध्यान दें

शुगर की दवा के साथ लेने पर शुगर कम हो सकती है। गर्भावस्था में न लें।

शब्दावली

कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

इसी तरह के और पौधे