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कालमेघ – Kalmegh

कालमेघ

Kalmegh

Andrographis paniculata · Acanthaceae (वासा कुल)

संस्कृत नाम: भूनिम्ब, यवतिक्ता

जड़ी-बूटीनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागपूरा पौधा (पंचांग), विशेषकर पत्ते
तासीरगर्म
धूपहल्की धूप या आधी छाँव
पानीमध्यम — ऊपर की मिट्टी सूखने पर
लगाने का समयजून, जुलाई

संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, तासीर गर्म। जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹70छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

कालमेघ 30–90 सेमी ऊँचा, चौकोर तने वाला छोटा पौधा है, जो इतना कड़वा होता है कि इसे 'कड़वाहट का राजा' कहा जाता है। इसका संस्कृत नाम 'भूनिम्ब' यानी 'ज़मीन का नीम' है। बंगाल-बिहार में बच्चों के लिवर और बुखार की घरेलू दवा के रूप में इसकी पुरानी परंपरा है।

पारंपरिक उपयोग

  1. बुखार, सर्दी-ज़ुकाम और गले की ख़राश में कालमेघ का काढ़ा पारंपरिक रूप से दिया जाता है।
  2. लिवर को सहारा देने और भूख बढ़ाने के लिए आयुर्वेद में इसका प्रयोग होता है।
  3. कड़वा होने से खून साफ़ करने और त्वचा के फोड़े-फुंसी में उपयोगी माना गया है।
  4. पेट के कीड़ों में लोक-परंपरा में दिया जाता है।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
तिक्त (कड़वा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
कफ और पित्त को शांत करता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

हल्की छाँव या धूप, नम मिट्टी। मई–जून में बीज बोएँ या पौधा लगाएँ; बरसात में तेज़ी से बढ़ता है। फूल आने से ठीक पहले (सितंबर–अक्टूबर) काटकर छाँव में सुखाएँ।

ध्यान दें

गर्भावस्था में और गर्भ की योजना बनाते समय न लें। लगातार लंबे समय तक या अधिक मात्रा में न लें।

शब्दावली

कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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