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काली मिर्च (मरिच) – Black Pepper

काली मिर्च (मरिच)

Black Pepper

Piper nigrum · Piperaceae (पिप्पली कुल)

संस्कृत नाम: मरिच, ऊषण, कृष्ण

मसाले व बीजनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागफल (दाने)
तासीरगर्म
धूपहल्की धूप या आधी छाँव
पानीज़्यादा — मिट्टी नम रखें
लगाने का समयजून, जुलाई, अगस्त

संक्षेप में: स्वाद में तीखा-चरपरा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹80छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

काली मिर्च एक सदाबहार बेल है, जिस पर लंबे गुच्छों में हरे दाने लगते हैं जो सूखकर काले हो जाते हैं। इसे 'मसालों का राजा' और 'काला सोना' कहा गया है, जिसके व्यापार के लिए यूरोपीय भारत आए थे। आयुर्वेद के 'त्रिकटु' (सोंठ, काली मिर्च, पिप्पली) में यह शामिल है।

पारंपरिक उपयोग

  1. तुलसी-अदरक के काढ़े में काली मिर्च डालना सर्दी, खाँसी और गले की ख़राश में सबसे प्रचलित घरेलू उपाय है।
  2. भोजन में डालने से भूख बढ़ती है और पाचन तेज़ होता है।
  3. हल्दी के साथ लेने से हल्दी का असर शरीर में बेहतर पहुँचता है।
  4. शहद और काली मिर्च का मिश्रण खाँसी और कफ में दिया जाता है।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
कटु (तीखा-चरपरा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), तीक्ष्ण (तेज़ असर वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
कफ और वात को शांत करती है, पित्त बढ़ाती है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

छाँव, नमी और गर्मी चाहिए (केरल जैसी जलवायु)। बिहार में आधी छाँव में, नम मिट्टी वाले बड़े गमले में, किसी पेड़ या डंडे पर चढ़ाकर उगा सकते हैं; पाले और लू से बचाएँ। फल 3–4 साल बाद आते हैं।

ध्यान दें

एसिडिटी, अल्सर और पाइल्स में ज़्यादा काली मिर्च न लें।

शब्दावली

त्रिकटु
सोंठ, काली मिर्च और पिप्पली — तीन तीखी चीज़ों का मिश्रण
कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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