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मेहंदी – Mehandi (Henna)

मेहंदी

Mehandi (Henna)

Lawsonia inermis · Lythraceae

संस्कृत नाम: मदयन्तिका, मेन्धिका, नखरञ्जनी

जड़ी-बूटीनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागपत्ते (मुख्य), फूल, बीज, छाल
तासीरठंडी
धूपपूरी धूप
पानीकम — मिट्टी सूखने पर

संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, कसैला, तासीर ठंडी। जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹50छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

मेहंदी एक घनी, झाड़ीदार पौधा है, जिसके पत्तों को पीसकर हाथ-पैर रँगने और बालों को रंग देने की परंपरा हज़ारों साल पुरानी है। शादी, तीज और करवाचौथ मेहंदी के बिना अधूरे हैं। इसके छोटे सफ़ेद-क्रीम फूलों की खुशबू बहुत तेज़ होती है और आयुर्वेद में इसके पत्ते ठंडक देने वाले माने गए हैं।

पारंपरिक उपयोग

  1. ताज़ा पिसी मेहंदी हाथ-पैरों पर लगाने से रंग के साथ गर्मी और जलन में ठंडक मिलती है।
  2. बालों में मेहंदी लगाना प्राकृतिक रंग, कंडीशनर और रूसी कम करने के लिए प्रचलित है।
  3. पत्तों का लेप पैरों की जलन, फटी एड़ियों और नाखूनों के फंगस में लगाया जाता है।
  4. पत्तों का काढ़ा मुँह के छालों में कुल्ले के लिए लोक-परंपरा में।
  5. घनी होने से बगीचे की बाड़ (हेज) के लिए बहुत अच्छी।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
तिक्त (कड़वा), कषाय (कसैला)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
ठंडी
दोषों पर असर
कफ और पित्त को शांत करती है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

पूरी धूप, किसी भी मिट्टी में; सूखा सह लेती है। बरसात में पौधा या कलम लगाएँ। बाड़ के लिए 30–45 सेमी दूरी पर लगाकर छँटाई करते रहें।

ध्यान दें

बाज़ार की 'काली मेहंदी' में मिलाया जाने वाला रसायन (PPD) गंभीर एलर्जी करता है — घर की हरी पत्ती वाली मेहंदी ही सुरक्षित है। G6PD की कमी वाले नवजात शिशुओं को मेहंदी न लगाएँ।

शब्दावली

कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
रसायन
शरीर को ताक़त देने, रोगों से बचाने और बुढ़ापा धीमा करने वाली औषधि

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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