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मौलसिरी (बकुल) – Maulsiri (Bakul)

मौलसिरी (बकुल)

Maulsiri (Bakul)

Mimusops elengi · Sapotaceae

संस्कृत नाम: बकुल, केसर, सिंहकेसर

वृक्षनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागछाल, फूल, फल, टहनी (दातून)
तासीरठंडी
धूपपूरी धूप
पानीमध्यम — ऊपर की मिट्टी सूखने पर

संक्षेप में: स्वाद में कसैला, तीखा-चरपरा, तासीर ठंडी। जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹110छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

मौलसिरी घना, सदाबहार, सुंदर पेड़ है, जिसके छोटे, तारे जैसे, बेहद खुशबूदार सफ़ेद-पीले फूल सूखने के बाद भी कई दिनों तक महकते हैं। पुराने महलों और मंदिरों के बगीचों में यह ज़रूर लगाया जाता था। आयुर्वेद में इसकी छाल दाँतों की मज़बूती के लिए प्रसिद्ध है।

पारंपरिक उपयोग

  1. मौलसिरी की दातून और छाल का मंजन हिलते दाँत और मसूड़ों से खून आने में पारंपरिक रूप से प्रयोग होता है।
  2. छाल के काढ़े से कुल्ला मुँह के छालों में।
  3. फूलों से इत्र और माला; सूखे फूल भी खुशबू देते हैं।
  4. पके नारंगी फल खाने योग्य और मीठे होते हैं।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
कषाय (कसैला), कटु (तीखा-चरपरा)
गुण (प्रकृति)
गुरु (भारी, देर से पचने वाला)
तासीर
ठंडी
दोषों पर असर
कफ और पित्त को शांत करता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

धूप या हल्की छाँव, उपजाऊ मिट्टी। बरसात में लगाएँ; धीरे बढ़ता है और घनी छाया देता है।

शब्दावली

कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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