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रुद्राक्ष – Rudraksha

रुद्राक्ष

Rudraksha

Elaeocarpus ganitrus (E. angustifolius) · Elaeocarpaceae

संस्कृत नाम: रुद्राक्ष, शिवाक्ष, भूतनाशन

वृक्षनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागबीज (रुद्राक्ष), फल का गूदा, छाल, पत्ते
धूपहल्की धूप या आधी छाँव
पानीज़्यादा — मिट्टी नम रखें
लगाने का समयजुलाई, अगस्त
₹150छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

रुद्राक्ष एक ऊँचा सदाबहार पेड़ है, जिसके नीले रंग के फलों के अंदर उभरी धारियों (मुख) वाली गुठली होती है — यही पवित्र रुद्राक्ष है। मान्यता है कि यह भगवान शिव के आँसुओं से उत्पन्न हुआ। यह नेपाल, असम, उत्तराखंड और दक्षिण-पूर्व एशिया के नम इलाकों में स्वाभाविक रूप से उगता है।

पारंपरिक उपयोग

  1. रुद्राक्ष की माला जप और धारण करने के लिए धार्मिक रूप से सबसे पवित्र मानी जाती है।
  2. आयुर्वेद और लोक-परंपरा में रुद्राक्ष को पानी में भिगोकर वह पानी BP और मन की बेचैनी में पीने की बात कही जाती है (यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है)।
  3. फल का गूदा लोक-परंपरा में सिरदर्द और मिर्गी जैसे दौरों में दिया जाता था।
  4. मंदिर परिसर और बड़े बगीचे में शुभ पेड़ के रूप में लगाया जाता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

नम, गर्म जलवायु, हल्की छाँव से धूप, उपजाऊ नम मिट्टी। बरसात में लगाएँ और गर्मी-लू में नियमित पानी दें। बिहार में पेड़ बढ़ जाता है, पर फल आने में 7–10 साल लगते हैं और कम आते हैं।

ध्यान दें

BP या कोई बीमारी हो तो रुद्राक्ष के पानी पर निर्भर न रहें — डॉक्टर की दवा जारी रखें।

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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