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शमी – Shami (Khejri)

शमी

Shami (Khejri)

Prosopis cineraria · Fabaceae (शिम्बी कुल)

संस्कृत नाम: शमी, सक्तुफला, तुङ्गा

वृक्षनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागछाल, पत्ते, फली (सांगरी), फूल
तासीरठंडी
धूपपूरी धूप
पानीकम — मिट्टी सूखने पर
लगाने का समयजुलाई, अगस्त

संक्षेप में: स्वाद में कसैला, कड़वा, तासीर ठंडी। जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹50छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

शमी (खेजड़ी) रेगिस्तान का कल्पवृक्ष है — बिना पानी के भी हरा रहने वाला काँटेदार पेड़, जो राजस्थान का राज्य वृक्ष है। दशहरे पर शमी पूजा होती है, क्योंकि पांडवों ने अज्ञातवास में अपने शस्त्र इसी पर छिपाए थे। शनिवार को शमी पूजा शनिदेव के लिए शुभ मानी जाती है, और इसकी पत्तियाँ गणेश जी को चढ़ाई जाती हैं।

पारंपरिक उपयोग

  1. दशहरा, गणेश पूजा और शनिवार की पूजा में शमी पत्र चढ़ाए जाते हैं।
  2. कसैली छाल का काढ़ा लोक-परंपरा में दस्त, खाँसी और त्वचा रोगों में दिया जाता है।
  3. फलियों (सांगरी) की सब्ज़ी राजस्थान का प्रसिद्ध व्यंजन है।
  4. पत्तियाँ पशुओं का पौष्टिक चारा हैं और पेड़ मिट्टी को उपजाऊ बनाता है।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
कषाय (कसैला), तिक्त (कड़वा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
ठंडी
दोषों पर असर
कफ और पित्त को शांत करता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

पूरी धूप, रेतीली, सूखी मिट्टी — ज़्यादा पानी और जलभराव से बचाएँ। बरसात में लगाएँ। धीरे बढ़ता है; पूजा के लिए बड़े गमले में भी रखा जाता है।

शब्दावली

कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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