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नीम – Neem

नीम

Neem

Azadirachta indica · Meliaceae (निम्ब कुल)

संस्कृत नाम: निम्ब, अरिष्ट, पिचुमर्द

वृक्षनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागपत्ते, छाल, टहनी (दातून), फूल, फल (निंबोली), बीज का तेल
तासीरठंडी
धूपपूरी धूप
पानीकम — मिट्टी सूखने पर

संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, कसैला, तासीर ठंडी। जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹90छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

नीम को 'गाँव का दवाखाना' कहा जाता है। यह सूखे में भी हरा रहने वाला, घनी छाया और साफ़ हवा देने वाला पेड़ है। आयुर्वेद में इसका संस्कृत नाम 'अरिष्ट' (रोग से मुक्त करने वाला) है और यह त्वचा रोग, खून की शुद्धि और कीटनाशक के रूप में सबसे प्रसिद्ध है।

पारंपरिक उपयोग

  1. नीम की दातून से दाँत और मसूड़े मज़बूत रहते हैं — यह भारत की सदियों पुरानी परंपरा है।
  2. नीम के पत्तों को उबालकर उस पानी से नहाने से खुजली, फोड़े-फुंसी और चर्म रोगों में आराम मिलता है।
  3. चैत्र में नीम की कोमल पत्तियाँ और फूल खाने की परंपरा खून साफ़ करने और मौसम बदलने पर बीमारी से बचाव के लिए है।
  4. नीम तेल और खली खेती में जैविक कीटनाशक और खाद के रूप में उपयोग होते हैं।
  5. सूखे पत्ते किताबों, कपड़ों और अनाज में रखने से कीड़े नहीं लगते।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
तिक्त (कड़वा), कषाय (कसैला)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
ठंडी
दोषों पर असर
कफ और पित्त को शांत करता है, वात बढ़ा सकता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

पूरी धूप, किसी भी मिट्टी में; सूखा और गर्मी सह लेता है। बरसात में लगाएँ। तेज़ी से बढ़ता है; घर की नींव से 4–5 मीटर दूर लगाएँ।

ध्यान दें

नीम का तेल खाने की चीज़ नहीं है — बच्चों को कभी न दें। गर्भावस्था में और गर्भ की योजना बनाते समय नीम का अंदरूनी सेवन न करें।

शब्दावली

अरिष्ट
काढ़े में ख़मीर उठाकर बनी तरल दवा
कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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