
नींबू
Lemon
Citrus limon / Citrus aurantiifolia (कागज़ी) · Rutaceae (जम्बीर कुल)
संस्कृत नाम: निम्बूक, जम्बीर
संक्षेप में: स्वाद में खट्टा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
किस्में: कागज़ी नींबू ₹130 · हज़ारा नींबू ₹130 · नींबू (बीज रहित) ₹185 · गागर नींबू ₹130
डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क
परिचय
नींबू हर रसोई का ज़रूरी फल है, जो भोजन का स्वाद, पाचन और विटामिन C तीनों बढ़ाता है। खट्टा होते हुए भी आयुर्वेद में इसे भूख बढ़ाने वाला, अरुचि दूर करने वाला और उल्टी रोकने वाला बताया गया है। कागज़ी, हज़ारा और गागर नींबू बिहार में बहुत लगाए जाते हैं।
पारंपरिक उपयोग
- गुनगुने पानी में नींबू और शहद लेना पाचन और कब्ज़ के लिए प्रचलित घरेलू उपाय है।
- शिकंजी (नींबू, नमक, चीनी, पानी) लू, दस्त और गर्मी में पानी की कमी में दी जाती है।
- जी मिचलाने और उल्टी में नींबू सूँघना या चूसना राहत देता है।
- विटामिन C से रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है; अचार हर मौसम में काम आता है।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- अम्ल (खट्टा)
- गुण (प्रकृति)
- लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), तीक्ष्ण (तेज़ असर वाला)
- तासीर
- गर्म
- दोषों पर असर
- वात और कफ को शांत करता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, अच्छी निकासी वाली मिट्टी; जलभराव से बचाएँ। बरसात या फरवरी–मार्च में लगाएँ। गमले में भी अच्छा फलता है; साल में दो-तीन बार फल।
ध्यान दें
दाँतों की संवेदनशीलता और एसिडिटी वाले रस को पानी में मिलाकर ही लें।
शब्दावली
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
- कफ
- शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





