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पत्थरचट्टा (पर्णबीज) – Patharchatta (Air Plant)

पत्थरचट्टा (पर्णबीज)

Patharchatta (Air Plant)

Kalanchoe pinnata (Bryophyllum pinnatum) · Crassulaceae

संस्कृत नाम: पर्णबीज, पाषाणभेद (लोक प्रयोग)

जड़ी-बूटीनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागपत्ते
तासीरठंडी
धूपपूरी धूप
पानीकम — मिट्टी सूखने पर

संक्षेप में: स्वाद में खट्टा, कसैला, तासीर ठंडी। जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹60छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

पत्थरचट्टा मोटे, रसीले, किनारे पर लहरदार पत्तों वाला पौधा है। इसकी ख़ासियत यह है कि पत्ता ज़मीन पर गिरते ही उसके किनारों से नए पौधे उग आते हैं — इसीलिए नाम 'पर्णबीज' (पत्ते से बीज)। लोक-चिकित्सा में यह पथरी के लिए बहुत प्रसिद्ध है।

पारंपरिक उपयोग

  1. सुबह खाली पेट 1–2 पत्ते चबाने या रस लेने की लोक-परंपरा पेशाब की पथरी में है (जाँच और इलाज डॉक्टर से कराएँ)।
  2. पत्ते गरम करके चोट, सूजन और फोड़ों पर बाँधे जाते हैं।
  3. पत्तों का रस कटने-जलने पर लगाया जाता है।
  4. बच्चों को पत्ते से पौधा उगते दिखाने के लिए मज़ेदार पौधा।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
अम्ल (खट्टा), कषाय (कसैला)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला)
तासीर
ठंडी
दोषों पर असर
पित्त और कफ को शांत करता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

धूप या हल्की छाँव, रेतीली मिट्टी, बहुत कम पानी। एक पत्ता मिट्टी पर रख दें — नए पौधे निकल आएँगे। गमले में आसानी से उगता है।

ध्यान दें

दिल की दवा (डिगॉक्सिन) ले रहे हों तो न लें। गर्भावस्था में अंदरूनी सेवन न करें।

शब्दावली

पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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