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पलाश (ढाक) – Palash (Flame of the Forest)

पलाश (ढाक)

Palash (Flame of the Forest)

Butea monosperma · Fabaceae (शिम्बी कुल)

संस्कृत नाम: पलाश, किंशुक, ब्रह्मवृक्ष

वृक्षनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागफूल, बीज, छाल, गोंद (कमरकस), पत्ते
तासीरगर्म
धूपपूरी धूप
पानीकम — मिट्टी सूखने पर

संक्षेप में: स्वाद में तीखा-चरपरा, कड़वा, कसैला, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹110छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

फागुन में जब पलाश के पत्ते झड़ जाते हैं और पूरा पेड़ नारंगी-लाल फूलों से भर जाता है, तो इसे 'जंगल की आग' कहते हैं। यह झारखंड का राज्य पुष्प है। इसके फूलों से पारंपरिक होली का केसरिया रंग बनता है और तीन पत्तों वाली टहनी ब्रह्मा-विष्णु-महेश का प्रतीक मानी जाती है।

पारंपरिक उपयोग

  1. फूलों को पानी में भिगोकर प्राकृतिक, त्वचा के लिए सुरक्षित होली का रंग बनाया जाता है।
  2. आयुर्वेद में बीजों का प्रयोग पेट के कीड़ों (कृमि) में, वैद्य की देखरेख में किया जाता है।
  3. फूलों का पानी पेशाब की जलन और गर्मी में ठंडक के लिए लोक-परंपरा में दिया जाता है।
  4. गोंद (कमरकस) प्रसूता के लड्डुओं और दस्त में उपयोग होता है।
  5. पत्तों से पत्तल-दोने बनते हैं; लकड़ी यज्ञ और उपनयन में पवित्र मानी जाती है।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
कटु (तीखा-चरपरा), तिक्त (कड़वा), कषाय (कसैला)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
गर्म (बीज), फूल ठंडे
दोषों पर असर
कफ और वात को शांत करता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

पूरी धूप, सूखी, पथरीली या खराब मिट्टी भी चलती है। बरसात में लगाएँ। धीरे बढ़ता है; 5–6 साल में फूल।

ध्यान दें

बीज तेज़ असर वाले हैं — बिना वैद्य की सलाह के न लें; गर्भावस्था में बिल्कुल नहीं।

शब्दावली

कृमि
पेट के कीड़े
कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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