
बहेड़ा
Bahera
Terminalia bellirica · Combretaceae (हरीतकी कुल)
संस्कृत नाम: बिभीतक, अक्ष, कलिद्रुम
संक्षेप में: स्वाद में कसैला, तासीर गर्म। बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क
परिचय
बहेड़ा 20–30 मीटर ऊँचा जंगली पेड़ है, जिसके भूरे, मखमली, गोल फल त्रिफला के तीन फलों (आँवला, हरड़, बहेड़ा) में से एक हैं। आयुर्वेद में यह खाँसी, गले और आँखों के लिए विशेष रूप से उपयोगी बताया गया है। पुराने समय में इसके बीज जुए के पासे के रूप में प्रयोग होते थे।
पारंपरिक उपयोग
- भूने बहेड़े का छिलका चूसने से खाँसी और गले की ख़राश में आराम की परंपरा है।
- त्रिफला के रूप में कब्ज़, पाचन और आँखों के लिए।
- बालों के तेल और त्रिफला से बाल धोने में।
- आवाज़ बैठने में बहेड़ा और शहद।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- कषाय (कसैला)
- गुण (प्रकृति)
- लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
- तासीर
- गर्म
- दोषों पर असर
- कफ को विशेष रूप से शांत करता है; तीनों दोषों में उपयोगी।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, गहरी मिट्टी। बरसात में लगाएँ। बड़ा जंगली पेड़ बनता है — खेत की मेड़ या बड़े परिसर में लगाएँ।
ध्यान दें
बीज की गिरी ज़्यादा खाने से नशा जैसा असर हो सकता है।
शब्दावली
- त्रिफला
- आँवला, हरड़ और बहेड़ा — तीन फलों का मिश्रण
- कफ
- शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





