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पवाँड़ (चक्रमर्द) – Pawad (Sickle Senna)

पवाँड़ (चक्रमर्द)

Pawad (Sickle Senna)

Senna tora (Cassia tora) · Fabaceae (शिम्बी कुल)

संस्कृत नाम: चक्रमर्द, प्रपुन्नाड, एडगज

जड़ी-बूटी
उपयोगी भागपत्ते, बीज, जड़
तासीरगर्म

संक्षेप में: स्वाद में तीखा-चरपरा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

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परिचय

पवाँड़ बरसात में खाली ज़मीन पर घना उगने वाला पौधा है, जिसके गोल-अंडाकार पत्ते तीन जोड़ों में, पीले फूल और लंबी, हँसिये जैसी मुड़ी फलियाँ होती हैं। संस्कृत नाम 'चक्रमर्द' का अर्थ है दाद (चक्र) को मिटाने वाला। इसके बीज कुछ जगह कॉफ़ी के विकल्प के रूप में भुने जाते हैं।

पारंपरिक उपयोग

  1. बीज या पत्तों का लेप (नींबू के रस के साथ) दाद, खाज और खुजली पर लगाने की पुरानी परंपरा है।
  2. कोमल पत्तों का साग बरसात में देहात में खाया जाता है।
  3. आयुर्वेद में हल्के जुलाब और त्वचा रोगों के योगों में।
  4. भुने बीज कॉफ़ी जैसे पेय में।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
कटु (तीखा-चरपरा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
कफ और वात को शांत करता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

अपने आप उगने वाला पौधा; धूप और किसी भी मिट्टी में बरसात में।

ध्यान दें

कच्चे बीज न खाएँ।

शब्दावली

कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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