
पपीता
Papaya
Carica papaya · Caricaceae
संस्कृत नाम: एरण्डकर्कटी, मधुकर्कटी
संक्षेप में: स्वाद में मीठा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क
परिचय
पपीता सबसे जल्दी फल देने वाला पेड़ है — 8–10 महीने में ही फल आ जाते हैं। पका पपीता पाचन के लिए सबसे अच्छे फलों में है, क्योंकि इसमें 'पपेन' नाम का प्राकृतिक पाचक तत्व होता है। आयुर्वेद ग्रंथों में यह बाद में शामिल हुआ, पर लोक-चिकित्सा में बहुत लोकप्रिय है।
पारंपरिक उपयोग
- पका पपीता सुबह खाने से पाचन और कब्ज़ में बहुत आराम मिलता है।
- कच्चे पपीते की सब्ज़ी और कच्चा पपीता मांस को मुलायम करने में उपयोग होता है।
- पत्तों का रस डेंगू में प्लेटलेट्स के लिए लोक-परंपरा में दिया जाता है (इलाज डॉक्टर की देखरेख में ही करें)।
- पके पपीते का गूदा चेहरे पर लगाने से त्वचा साफ़ होती है।
आयुर्वेदिक गुण
- गुण
- पका फल — रस: मधुर (मीठा) · तासीर: गर्म
- दोषों पर असर
- वात और कफ को शांत करता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, अच्छी निकासी वाली मिट्टी; जलभराव में तुरंत सड़ जाता है। फरवरी–मार्च या जून–सितंबर में लगाएँ। रेड लेडी जैसी किस्में हर पौधे पर फल देती हैं; 2–3 साल बाद नया पौधा लगाएँ।
ध्यान दें
गर्भावस्था में कच्चा या अधपका पपीता बिल्कुल न खाएँ — इसका दूध गर्भाशय पर असर करता है।
शब्दावली
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
- कफ
- शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





