
प्याज
Pyaz (Onion)
Allium cepa · Amaryllidaceae
संस्कृत नाम: पलाण्डु, दुर्गन्ध, मुखदूषक
संक्षेप में: स्वाद में मीठा, तीखा-चरपरा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
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परिचय
प्याज लगभग हर भारतीय सब्ज़ी का आधार है। इसकी परतदार गाँठ ज़मीन के अंदर और खोखले हरे पत्ते ऊपर होते हैं; बीज के लिए सफ़ेद गोल फूल-गुच्छे आते हैं। देहात में लू से बचने के लिए जेब में प्याज रखने की कहावत मशहूर है।
पारंपरिक उपयोग
- कच्चा प्याज गर्मी में लू से बचाव के लिए खाने की लोक-परंपरा है।
- प्याज का रस और शहद खाँसी में घरेलू नुस्खे के रूप में।
- कीड़े के डंक पर कटा प्याज रगड़ने से जलन कम होती है।
- हरे प्याज के पत्ते सलाद और सब्ज़ी में।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- मधुर (मीठा), कटु (तीखा-चरपरा)
- गुण (प्रकृति)
- गुरु (भारी, देर से पचने वाला), तीक्ष्ण (तेज़ असर वाला)
- तासीर
- गर्म (आयुर्वेद के अनुसार)
- दोषों पर असर
- वात को शांत करता है; कफ-पित्त बढ़ा सकता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
अक्टूबर–नवंबर में पौध या गाँठ लगाएँ (रबी), बरसात की खरीफ़ फ़सल भी होती है। धूप, भुरभुरी मिट्टी; गमले में हरा प्याज आसानी से उगता है।
शब्दावली
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
- कफ
- शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
- पित्त
- शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।


