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ईख (गन्ना) – Sugarcane

ईख (गन्ना)

Sugarcane

Saccharum officinarum · Poaceae (तृण कुल)

संस्कृत नाम: इक्षु, रसाल, असिपत्र

सब्ज़ी व फ़सल
उपयोगी भागतने का रस, गुड़, जड़
तासीरठंडी

संक्षेप में: स्वाद में मीठा, तासीर ठंडी। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; जलन, एसिडिटी और गर्मी जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

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परिचय

ईख (गन्ना) बाँस जैसी मोटी, मीठे रस से भरी घास है, जिससे गुड़, चीनी और खांड बनती है। बिहार के चंपारण, गोपालगंज और समस्तीपुर में गन्ने की बड़ी खेती होती है। छठ पूजा में गन्ने का विशेष स्थान है।

पारंपरिक उपयोग

  1. ताज़ा गन्ने का रस गर्मी, थकान और पेशाब की जलन में ठंडक और ऊर्जा देता है।
  2. लोक-परंपरा में पीलिया के बाद गन्ने का रस दिया जाता है (साफ़-सुथरी जगह का ही पिएँ)।
  3. गुड़ भोजन के बाद पाचन के लिए और सर्दी में खाया जाता है।
  4. छठ पूजा, देवोत्थान एकादशी और तुलसी विवाह में गन्ना चढ़ाया जाता है।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
मधुर (मीठा)
गुण (प्रकृति)
गुरु (भारी, देर से पचने वाला), स्निग्ध (चिकनाई वाला)
तासीर
ठंडी
दोषों पर असर
वात और पित्त को शांत करता है, कफ बढ़ाता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

पूरी धूप, भरपूर पानी और उपजाऊ मिट्टी। फरवरी–मार्च में गाँठ वाले टुकड़े बोएँ; 10–12 महीने में तैयार।

ध्यान दें

शुगर के मरीज़ गन्ने का रस और गुड़ न लें। सड़क किनारे का रस बर्फ़ और गंदे बर्तनों से संक्रमण कर सकता है।

शब्दावली

वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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