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रंगून क्रीपर (मधुमालती) – Rangoon Creeper (Madhumalti)

रंगून क्रीपर (मधुमालती)

Rangoon Creeper (Madhumalti)

Combretum indicum (Quisqualis indica) · Combretaceae

संस्कृत नाम: मधुमालती, रङ्गूनलता

लता / बेलनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागबीज, पत्ते, फूल
धूपपूरी धूप
पानीमध्यम — ऊपर की मिट्टी सूखने पर
₹100छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

मधुमालती एक तेज़ बढ़ने वाली बेल है, जिसके लटकते गुच्छों में फूल पहले सफ़ेद खिलते हैं, फिर गुलाबी और अंत में गहरे लाल हो जाते हैं — एक ही गुच्छे में तीन रंग। शाम को इसकी मीठी खुशबू पूरे आँगन में फैल जाती है। दक्षिण-पूर्व एशिया की पारंपरिक चिकित्सा में इसके बीज पेट के कीड़ों की दवा रहे हैं।

पारंपरिक उपयोग

  1. पारंपरिक चीनी और दक्षिण-पूर्व एशियाई चिकित्सा में भुने बीज पेट के कीड़ों में दिए जाते थे (केवल चिकित्सक द्वारा)।
  2. पत्तों का लेप लोक-परंपरा में फोड़ों और सिरदर्द में लगाया जाता है।
  3. फूल मधुमक्खियों, तितलियों और शहद खाने वाले पक्षियों को आकर्षित करते हैं।
  4. बालकनी, गेट और पर्गोला को ढकने वाली सबसे सुंदर खुशबूदार बेल।

कैसे लगाएँ और देखभाल

पूरी धूप, उपजाऊ मिट्टी, नियमित पानी। बरसात या फरवरी–मार्च में लगाएँ; मज़बूत सहारा दें। मार्च से अक्टूबर तक फूल। हर साल सर्दी के अंत में छँटाई करें।

ध्यान दें

बीज ज़्यादा खाने से हिचकी, उल्टी और चक्कर आते हैं — बच्चों से दूर रखें।

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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