
करवीर (कनेर)
Oleander (Kaner)
Nerium oleander · Apocynaceae (करवीर कुल)
संस्कृत नाम: करवीर, अश्वमारक, हयमार
संक्षेप में: स्वाद में तीखा-चरपरा, कड़वा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है — यह विशेष सावधानी वाला पौधा है; इसका सेवन केवल वैद्य की देखरेख में करें।
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परिचय
करवीर (लाल, गुलाबी या सफ़ेद कनेर) पतले, लंबे, चमड़े जैसे पत्तों वाली सदाबहार झाड़ी है, जिस पर सालभर गुच्छों में फूल आते हैं। इसके संस्कृत नाम 'अश्वमारक' (घोड़े को मारने वाला) से ही पता चलता है कि इसका असर कितना तेज़ है। सफ़ेद कनेर के फूल शिवजी को चढ़ाए जाते हैं।
पारंपरिक उपयोग
- फूल पूजा और माला में उपयोग होते हैं।
- आयुर्वेद में शोधित जड़-छाल का तेल केवल बाहरी रूप से त्वचा रोगों में बताया गया है, वह भी वैद्य की देखरेख में।
- सूखा, धुआँ और प्रदूषण सह लेता है, इसलिए हाईवे के डिवाइडर और बाड़ में लगाया जाता है।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- कटु (तीखा-चरपरा), तिक्त (कड़वा)
- गुण (प्रकृति)
- लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला), तीक्ष्ण (तेज़ असर वाला)
- तासीर
- गर्म
- दोषों पर असर
- कफ और वात को शांत करता है (केवल बाहरी प्रयोग)।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, बहुत कम पानी, किसी भी मिट्टी में। कभी भी लगा सकते हैं; बहुत कम देखभाल चाहिए।
ध्यान दें
यह पौधा खाने योग्य नहीं है। पत्ता, फूल, बीज या जलाने का धुआँ — सब हानिकारक हैं। बच्चों और पशुओं से दूर लगाएँ; इसकी टहनी को सींक/कटार की तरह खाने की चीज़ों में न लगाएँ।
शब्दावली
- शोधित
- ख़ास विधि से साफ़ और सुरक्षित किया हुआ (यह काम केवल वैद्य करते हैं)
- कफ
- शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





