
करौंदा
Karonda
Carissa carandas · Apocynaceae
संस्कृत नाम: करमर्द, सुषेण
संक्षेप में: स्वाद में खट्टा, तासीर गर्म।
डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क
परिचय
करौंदा काँटेदार, घनी झाड़ी है, जिस पर सफ़ेद खुशबूदार फूल और गुलाबी-लाल से काले होते छोटे फल लगते हैं। इसकी काँटेदार झाड़ी खेत और बगीचे की सबसे मज़बूत जीवित बाड़ बनाती है। करौंदे का अचार और मुरब्बा बिहार में बहुत पसंद है।
पारंपरिक उपयोग
- कच्चे फल का अचार और चटनी भूख बढ़ाने और पाचन के लिए खाई जाती है।
- फल विटामिन C और आयरन से भरपूर है; खून की कमी में मुरब्बा खाया जाता है।
- पका फल प्यास और गर्मी की जलन में ठंडक देता है।
- काँटेदार झाड़ी से पशुओं को रोकने वाली बाड़ बनती है।
आयुर्वेदिक गुण
- गुण
- कच्चा फल — रस: अम्ल (खट्टा) · गुण: गुरु (भारी, देर से पचने वाला) · तासीर: गर्म; पका फल मधुर (मीठा)
- दोषों पर असर
- पका फल वात-पित्त शामक; कच्चा फल भूख बढ़ाता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, किसी भी मिट्टी में, सूखा सह लेता है। बरसात में लगाएँ। 2–3 साल में फल देने लगता है; बाड़ के लिए 60 सेमी की दूरी पर लगाएँ।
शब्दावली
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
- पित्त
- शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





