
चम्पा
Champa (Son Champa)
Magnolia champaca · Magnoliaceae
संस्कृत नाम: चम्पक, हेमपुष्प, स्वर्णचम्पक
संक्षेप में: स्वाद में तीखा-चरपरा, कड़वा, कसैला, तासीर ठंडी। जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क
परिचय
सोन चम्पा (स्वर्ण चम्पक) एक सदाबहार पेड़ है, जिस पर सुनहरे-नारंगी, बेहद तेज़ और मीठी खुशबू वाले फूल आते हैं। इन फूलों से दुनिया के महँगे इत्र बनते हैं और ये देवताओं को चढ़ाए जाते हैं। ध्यान दें: बगीचों में आम 'चम्पा/गुलैची' (प्लूमेरिया) अलग पौधा है।
पारंपरिक उपयोग
- आयुर्वेद में फूलों का प्रयोग जलन, पेशाब की जलन और त्वचा रोगों में बताया गया है।
- छाल का काढ़ा लोक-परंपरा में बुखार में दिया जाता है।
- फूलों से इत्र और खुशबूदार तेल बनता है; बालों में लगाने की परंपरा है।
- मंदिर और घर के आँगन में खुशबू के लिए लगाया जाने वाला शुभ पेड़।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- कटु (तीखा-चरपरा), तिक्त (कड़वा), कषाय (कसैला)
- तासीर
- ठंडी
- दोषों पर असर
- कफ और पित्त को शांत करता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
धूप या हल्की छाँव, उपजाऊ, नम पर अच्छी निकासी वाली मिट्टी। बरसात में लगाएँ। कलमी पौधा 3–4 साल में फूलने लगता है।
शब्दावली
- कफ
- शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
- पित्त
- शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





