PARIJATNURSERY & GARDEN

देवदार

Deodar

Cedrus deodara · Pinaceae

संस्कृत नाम: देवदारु, सुरदारु, भद्रदारु

वृक्षनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागलकड़ी (सारकाष्ठ), तेल, राल
तासीरगर्म
धूपहल्की धूप या आधी छाँव
पानीमध्यम — ऊपर की मिट्टी सूखने पर
लगाने का समयअक्टूबर, नवंबर, फ़रवरी

संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹150छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

देवदार (देवताओं की लकड़ी) हिमालय का भव्य, शंकु आकार का सदाबहार पेड़ है, जिसके पत्ते सुई जैसे और लकड़ी खुशबूदार, सड़न-रोधी होती है। हिमाचल का राज्य वृक्ष है। आयुर्वेद में देवदारु वात रोग, जोड़ों के दर्द और सूजन की प्रमुख औषधि है और 'देवदार्वादि' कई योगों में शामिल है।

पारंपरिक उपयोग

  1. देवदारु की लकड़ी का चूर्ण और तेल आयुर्वेद में जोड़ों के दर्द, सूजन और गठिया में प्रयोग होता है।
  2. देवदार तेल त्वचा के फंगल संक्रमण और खुजली में बाहरी रूप से लगाया जाता है।
  3. खाँसी और कफ के योगों में देवदारु डाला जाता है।
  4. खुशबूदार लकड़ी मंदिर, घर और अगरबत्ती में उपयोग होती है।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
तिक्त (कड़वा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), स्निग्ध (चिकनाई वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
कफ और वात को शांत करता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

यह ठंडे पहाड़ों (1,500–3,000 मीटर) का पेड़ है। बिहार के मैदान की गर्मी इसके लिए कठिन है — हल्की छाँव, नम पर अच्छी निकासी वाली मिट्टी और गर्मी में नियमित पानी के साथ गमले में शोभा और औषधीय-बगीचे के लिए रखा जा सकता है; बड़ा पेड़ बनने की उम्मीद न करें।

ध्यान दें

देवदार तेल अंदरूनी रूप से न लें।

शब्दावली

वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

इसी तरह के और पौधे