PARIJATNURSERY & GARDEN
धतूरा – Dhatura

धतूरा

Dhatura

Datura metel · Solanaceae (कंटकारी कुल)

संस्कृत नाम: धत्तूर, कनक, उन्मत्त

फूलविशेष सावधानीनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागकेवल पूजा व बाहरी उपयोग — पत्ते (चिकित्सक की देखरेख में)
तासीरगर्म
धूपपूरी धूप
पानीकम — मिट्टी सूखने पर

संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, तीखा-चरपरा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है — यह विशेष सावधानी वाला पौधा है; इसका सेवन केवल वैद्य की देखरेख में करें।

₹115छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

धतूरा बड़े, सफ़ेद या बैंगनी, तुरही जैसे फूलों और काँटेदार गोल फलों वाला पौधा है। इसके फूल और फल भगवान शिव को चढ़ाए जाते हैं। संस्कृत नाम 'उन्मत्त' (पागल कर देने वाला) बताता है कि इसका असर कितना तेज़ है — इसके बीज खाने से बेहोशी जैसी गंभीर समस्या हो सकती है।

पारंपरिक उपयोग

  1. फूल और फल शिव पूजा, विशेषकर महाशिवरात्रि और सावन में चढ़ाए जाते हैं।
  2. पुराने समय में पत्तों का गरम लेप जोड़ों के दर्द और सूजन पर बाहरी रूप से बाँधा जाता था।
  3. आयुर्वेद में शोधित धतूरे का प्रयोग केवल अनुभवी वैद्य द्वारा दमा के कुछ योगों में बताया गया है।
  4. डबल फूलों वाली किस्म बगीचे में सजावट के लिए लगाई जाती है।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
तिक्त (कड़वा), कटु (तीखा-चरपरा)
गुण (प्रकृति)
गुरु (भारी, देर से पचने वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
कफ और वात को शांत करता है (शोधन के बाद, वैद्य द्वारा)।

कैसे लगाएँ और देखभाल

पूरी धूप, किसी भी मिट्टी में; पानी कम। बीज या पौधे से कभी भी लग जाता है। बच्चों की पहुँच से दूर लगाएँ और फल पकने से पहले तोड़ दें।

ध्यान दें

यह पौधा खाने योग्य नहीं है। बीज, पत्ते या फूल कभी न खाएँ और किसी को न दें। बच्चे इसके बीज को कभी-कभी खाने की चीज़ समझ लेते हैं — सावधान रहें।

शब्दावली

शोधित
ख़ास विधि से साफ़ और सुरक्षित किया हुआ (यह काम केवल वैद्य करते हैं)
कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
शोधन
तेज़ असर वाले हिस्से को ख़ास विधि से साफ़ और सुरक्षित करना (केवल वैद्य)

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

इसी तरह के और पौधे