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दूब (दूर्वा) – Doob Grass

दूब (दूर्वा)

Doob Grass

Cynodon dactylon · Poaceae (तृण कुल)

संस्कृत नाम: दूर्वा, शतपर्विका, अमृता

जड़ी-बूटीनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागपूरी घास, जड़
तासीरठंडी
धूपपूरी धूप
पानीमध्यम — ऊपर की मिट्टी सूखने पर

संक्षेप में: स्वाद में मीठा, कड़वा, कसैला, तासीर ठंडी। जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

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परिचय

दूब ज़मीन पर फैलने वाली मुलायम घास है, जिसे भगवान गणेश को चढ़ाना सबसे शुभ माना जाता है। लॉन और मैदान इसी से हरे रहते हैं। आयुर्वेद में दूर्वा ठंडक देने वाली और खून रोकने वाली औषधि है।

पारंपरिक उपयोग

  1. नाक से खून आने (नकसीर) पर दूब का रस सूँघने/डालने की पुरानी घरेलू परंपरा है।
  2. दूब का रस पेशाब की जलन और शरीर की गर्मी में।
  3. घाव और कटने पर पिसी दूब का लेप।
  4. गणेश पूजा, विवाह और हर शुभ कार्य में दूर्वा अनिवार्य है; लॉन के लिए सबसे टिकाऊ घास।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
मधुर (मीठा), तिक्त (कड़वा), कषाय (कसैला)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला)
तासीर
ठंडी
दोषों पर असर
कफ और पित्त को शांत करती है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

पूरी धूप, किसी भी मिट्टी में; टुकड़े लगाने से फैल जाती है। लॉन के लिए फरवरी–मार्च या बरसात में लगाएँ।

शब्दावली

कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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