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धातकी (धाय) – Dhataki (Dhawai)

धातकी (धाय)

Dhataki (Dhawai)

Woodfordia fruticosa · Lythraceae

संस्कृत नाम: धातकी, अग्निज्वाला, ताम्रपुष्पी

फूलनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागफूल (मुख्य), पत्ते
तासीरठंडी
धूपपूरी धूप
पानीकम — मिट्टी सूखने पर
लगाने का समयजुलाई, अगस्त

संक्षेप में: स्वाद में कसैला, तीखा-चरपरा, तासीर ठंडी। जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹50छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

धातकी 2–3 मीटर की झाड़ी है, जो फरवरी–अप्रैल में नली जैसे चमकीले लाल फूलों से ढक जाती है — इसीलिए नाम 'अग्निज्वाला'। आयुर्वेद के लगभग सभी आसव-अरिष्ट (जैसे अशोकारिष्ट, दशमूलारिष्ट) बनाने में धातकी के फूल डाले जाते हैं, क्योंकि उनमें प्राकृतिक ख़मीर होता है।

पारंपरिक उपयोग

  1. आसव-अरिष्ट बनाने में प्राकृतिक ख़मीर (किण्वन) के लिए फूल अनिवार्य हैं।
  2. कसैले फूलों का चूर्ण दस्त, पेचिश और ज़्यादा रक्तस्राव में आयुर्वेदिक योगों में।
  3. फूलों का लेप घाव और जलने पर।
  4. लाल फूलों से प्राकृतिक रंग बनता है; मधुमक्खियों का पसंदीदा।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
कषाय (कसैला), कटु (तीखा-चरपरा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
ठंडी
दोषों पर असर
कफ और पित्त को शांत करती है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

धूप, सूखी पहाड़ी या पथरीली ज़मीन पसंद है। बरसात में लगाएँ।

ध्यान दें

गर्भावस्था में न लें।

शब्दावली

आसव
ख़मीर उठाकर बनी तरल दवा
अरिष्ट
काढ़े में ख़मीर उठाकर बनी तरल दवा
कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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