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हरसिंगार (पारिजात) – Harsingar (Parijat)

हरसिंगार (पारिजात)

Harsingar (Parijat)

Nyctanthes arbor-tristis · Oleaceae (पारिजात कुल)

संस्कृत नाम: पारिजात, शेफालिका, प्राजक्ता

फूलनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागपत्ते (मुख्य), फूल, बीज, छाल
तासीरगर्म
धूपपूरी धूप
पानीमध्यम — ऊपर की मिट्टी सूखने पर

संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹100छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

हरसिंगार (पारिजात) — हमारी नर्सरी का नाम इसी पवित्र पौधे पर है। इसके सफ़ेद, नारंगी डंडी वाले, बेहद खुशबूदार फूल रात में खिलते हैं और सुबह ज़मीन पर बिछ जाते हैं। मान्यता है कि श्रीकृष्ण इसे स्वर्ग से लाए थे; यह एकमात्र फूल है जिसे ज़मीन से उठाकर भगवान को चढ़ाया जाता है। आयुर्वेद में इसके पत्ते जोड़ों के दर्द और बुखार की प्रसिद्ध दवा हैं।

पारंपरिक उपयोग

  1. पत्तों का काढ़ा जोड़ों के दर्द और साइटिका (गृध्रसी) में आयुर्वेद में प्रयोग होता है।
  2. पुराने बुखार और बार-बार आने वाले बुखार में पत्तों का रस परंपरा से दिया जाता है।
  3. पत्तों का रस बच्चों के पेट के कीड़ों में लोक-परंपरा में दिया जाता है।
  4. नारंगी डंडियों से पहले कपड़े और मिठाई रँगने का प्राकृतिक रंग बनता था।
  5. फूल पूजा, माला और खुशबू के लिए; बंगाल में शरद ऋतु और दुर्गा पूजा का प्रतीक।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
तिक्त (कड़वा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
कफ और वात को शांत करता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

धूप या हल्की छाँव, अच्छी निकासी वाली मिट्टी; जलभराव से बचाएँ। बरसात में लगाएँ। अगस्त से दिसंबर तक फूल। फूल के बाद (फरवरी) हल्की छँटाई करें।

ध्यान दें

पत्ते बहुत कड़वे हैं; ज़्यादा मात्रा से पेट में जलन या उल्टी हो सकती है। गर्भावस्था में अंदरूनी सेवन न करें।

शब्दावली

गृध्रसी
साइटिका — कमर से पैर तक जाने वाला नस का दर्द
कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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