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धनिया – Dhaniya (Coriander)

धनिया

Dhaniya (Coriander)

Coriandrum sativum · Apiaceae (अजमोद कुल)

संस्कृत नाम: धान्यक, कुस्तुम्बुरु, छत्रधान्य

मसाले व बीजनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागपत्ते, बीज
तासीरठंडी
धूपपूरी धूप
पानीमध्यम — ऊपर की मिट्टी सूखने पर
लगाने का समयसितंबर, अक्टूबर, नवंबर

संक्षेप में: स्वाद में कसैला, कड़वा, मीठा, तासीर ठंडी। वात, पित्त और कफ — तीनों को संतुलित रखने वाली।

₹50छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

धनिया हर रसोई की जान है — हरे पत्ते चटनी-सजावट में और बीज मसाले में। छोटे सफ़ेद-गुलाबी फूलों की छतरियाँ सर्दियों में खिलती हैं। आयुर्वेद में धनिया पित्त को शांत करने वाली, पाचन सुधारने वाली सौम्य औषधि है।

पारंपरिक उपयोग

  1. रात भर भिगोए धनिये के बीजों का पानी पेट की जलन, एसिडिटी और पेशाब की जलन में पारंपरिक रूप से पिया जाता है।
  2. हरे धनिये की चटनी भूख और पाचन बढ़ाती है।
  3. धनिया-जीरा-सौंफ का पानी गैस और अपच में।
  4. आँखों की जलन में धनिये के पानी से धोने की परंपरा (साफ़ छने पानी से)।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
कषाय (कसैला), तिक्त (कड़वा), मधुर (मीठा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), स्निग्ध (चिकनाई वाला)
तासीर
ठंडी (बीज हल्का गर्म-ठंडा)
दोषों पर असर
तीनों दोषों को संतुलित करता है, विशेषकर पित्त।

कैसे लगाएँ और देखभाल

अक्टूबर–फरवरी सबसे अच्छा समय; बीज हल्का दबाकर दो हिस्से करके बोएँ। धूप, नम मिट्टी। 30–40 दिन में पत्ते तोड़ने लायक। गमले में आसानी से उगता है।

शब्दावली

पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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