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इलायची – Cardamom

इलायची

Cardamom

Elettaria cardamomum · Zingiberaceae (आर्द्रक कुल)

संस्कृत नाम: एला, सूक्ष्मैला

मसाले व बीजनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागफल (दाने), बीज
तासीरठंडी
धूपछाँव / कम रोशनी
पानीज़्यादा — मिट्टी नम रखें
लगाने का समयजून, जुलाई, अगस्त

संक्षेप में: स्वाद में तीखा-चरपरा, मीठा, तासीर ठंडी। वात, पित्त और कफ — तीनों को संतुलित रखने वाली।

₹75छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

छोटी इलायची अदरक परिवार का 2–3 मीटर ऊँचा पौधा है, जिसके लंबे पत्ते जड़ के गुच्छे से निकलते हैं और फल ज़मीन के पास लगते हैं। इसे 'मसालों की रानी' कहा जाता है। मुँह की दुर्गंध, उल्टी और पाचन में यह सबसे सौम्य औषधि मानी गई है।

पारंपरिक उपयोग

  1. इलायची के दाने चबाने से मुँह की दुर्गंध दूर होती है और भोजन के बाद ताज़गी आती है।
  2. सफ़र में जी मिचलाने और उल्टी में इलायची चूसने की घरेलू परंपरा है।
  3. चाय, खीर और मिठाई में डालने से गैस और भारीपन कम होता है।
  4. खाँसी और गले की ख़राश में इलायची को मिश्री के साथ लिया जाता है।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
कटु (तीखा-चरपरा), मधुर (मीठा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
ठंडी
दोषों पर असर
तीनों दोषों को संतुलित करती है, विशेषकर कफ और वात।

कैसे लगाएँ और देखभाल

यह छाँव, नमी और ठंडक पसंद करने वाला पौधा है; बिहार में तेज़ धूप और लू से बचाकर, आधी छाँव में बड़े गमले में रखें और मिट्टी हमेशा नम रखें। सजावटी और पत्तों के लिए अच्छा है; मैदानी इलाके में फल कम ही आते हैं।

ध्यान दें

पथरी (गॉल स्टोन) वाले लोग अधिक मात्रा न लें।

शब्दावली

कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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