
गुड़हल (जवाकुसुम)
Gudhal (Hibiscus)
Hibiscus rosa-sinensis · Malvaceae (कार्पास कुल)
संस्कृत नाम: जपा, जवाकुसुम, ओड्रपुष्प
संक्षेप में: स्वाद में कसैला, मीठा, तासीर ठंडी। जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
किस्में: गुड़हल (देसी लाल) ₹100 · गुड़हल (डबल लाल) ₹115 · गुड़हल (पीला) ₹100
डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क
परिचय
गुड़हल (जवाकुसुम) बड़े, चमकीले लाल फूलों वाली झाड़ी है, जिसके फूल माँ काली, दुर्गा और गणेश जी को विशेष रूप से चढ़ाए जाते हैं। देसी लाल इकहरा गुड़हल दवा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इसके फूल और पत्ते बालों की देखभाल के लिए प्रसिद्ध हैं।
पारंपरिक उपयोग
- फूल और पत्तों को नारियल तेल में पकाकर बालों में लगाने से बाल झड़ना और रूखापन कम होता है।
- पत्तों को पीसकर शैम्पू की तरह बाल धोने की दक्षिण भारतीय परंपरा।
- फूलों की चाय ठंडक देने और विटामिन C के लिए; खट्टे स्वाद की।
- पूजा, विशेषकर काली-दुर्गा पूजा में लाल गुड़हल अनिवार्य है।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- कषाय (कसैला), मधुर (मीठा)
- गुण (प्रकृति)
- लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
- तासीर
- ठंडी
- दोषों पर असर
- कफ और पित्त को शांत करता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, उपजाऊ मिट्टी, नियमित पानी और खाद। बरसात या फरवरी–मार्च में कलम से लगाएँ; लगभग सालभर फूल देता है। मिलीबग से बचाएँ।
ध्यान दें
गर्भावस्था में फूल-पत्ती का अंदरूनी सेवन न करें। BP की दवा के साथ इसकी चाय ज़्यादा न पिएँ।
शब्दावली
- कफ
- शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
- पित्त
- शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





