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गेंदा – Marigold

गेंदा

Marigold

Tagetes erecta · Asteraceae (भृंगराज कुल)

संस्कृत नाम: स्थूलपुष्प, झण्डू (लोक नाम)

फूलनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागफूल, पत्ते
धूपपूरी धूप
पानीमध्यम — ऊपर की मिट्टी सूखने पर
₹50छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

किस्में: गेंदा (नारंगी) ₹50 · गेंदा (पीला) ₹50

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

गेंदा भारत का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला पूजा और माला का फूल है। यह मूल रूप से मेक्सिको से आया, इसलिए पुराने ग्रंथों में नहीं है, पर लोक-चिकित्सा में इसके पत्ते और फूल घाव पर लगाने के लिए प्रसिद्ध हैं। इसकी गंध से कई कीट दूर रहते हैं।

पारंपरिक उपयोग

  1. पत्तों को पीसकर कटे-छिले घाव और सूजन पर लगाने की लोक-परंपरा है।
  2. पत्तों का रस कान दर्द में लोक-परंपरा में डाला जाता है (कान का पर्दा फटा हो तो नहीं)।
  3. फूल पूजा, माला, तोरण और त्योहारों की सजावट में काम आते हैं।
  4. सब्ज़ी के बगीचे में किनारे लगाने से जड़ के कीड़े (निमेटोड) और कुछ कीट कम होते हैं।

कैसे लगाएँ और देखभाल

पूरी धूप, सामान्य मिट्टी। सितंबर–अक्टूबर (सर्दी के लिए) और जनवरी–फरवरी (गर्मी के लिए) में लगाएँ; 50–60 दिन में फूल आने लगते हैं। कलियाँ आने से पहले ऊपर की चोटी तोड़ने से पौधा घना होता है।

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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