
गूलर
Gular (Cluster Fig)
Ficus racemosa · Moraceae (वट कुल)
संस्कृत नाम: उदुम्बर, जन्तुफल, यज्ञाङ्ग
संक्षेप में: स्वाद में कसैला, मीठा, तासीर ठंडी। जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
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परिचय
गूलर (उदुम्बर) बरगद-पीपल परिवार का पेड़ है, जिसके फल तने और मोटी शाखाओं पर गुच्छों में लगते हैं। इसके फूल फल के अंदर छिपे रहते हैं, इसलिए कहावत है 'गूलर का फूल' (जो कभी न दिखे)। यह पंचवल्कल (पाँच पवित्र पेड़ों की छाल) में से एक है और यज्ञ की समिधा में उपयोग होता है।
पारंपरिक उपयोग
- कसैली छाल का काढ़ा दस्त, खूनी बवासीर और घाव धोने में पारंपरिक रूप से उपयोग होता है।
- पके फल पौष्टिक माने जाते हैं; कच्चे फलों की सब्ज़ी देहात में बनती है।
- आयुर्वेद में इसके फल और छाल का प्रयोग शुगर संतुलन के योगों में बताया गया है।
- छाल और दूध मुँह के छालों और फटी एड़ियों पर लगाए जाते हैं।
- पूजा-पाठ और हवन में इसकी लकड़ी शुभ मानी जाती है।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- कषाय (कसैला), मधुर (मीठा)
- गुण (प्रकृति)
- गुरु (भारी, देर से पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
- तासीर
- ठंडी
- दोषों पर असर
- कफ और पित्त को शांत करता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, नम मिट्टी पसंद है; नदी-तालाब किनारे बहुत अच्छा बढ़ता है। बरसात में लगाएँ। घर की नींव से दूर लगाएँ, क्योंकि जड़ें बड़ी होती हैं।
ध्यान दें
पके फलों के अंदर अक्सर छोटे कीड़े (परागण करने वाले ततैये) होते हैं — खोलकर, साफ़ करके ही खाएँ।
शब्दावली
- उदुम्बर
- गूलर का संस्कृत नाम
- पंचवल्कल
- पाँच पवित्र पेड़ों (बरगद, पीपल, गूलर, पाकड़, पारस पीपल) की छाल
- समिधा
- हवन में डाली जाने वाली लकड़ी
- कफ
- शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
- पित्त
- शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





