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शरपुंखा (सरफोंका) – Sharpunkha

शरपुंखा (सरफोंका)

Sharpunkha

Tephrosia purpurea · Fabaceae (शिम्बी कुल)

संस्कृत नाम: शरपुङ्खा, प्लीहशत्रु, नीली

जड़ी-बूटीनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागपूरा पौधा, जड़
तासीरगर्म
धूपपूरी धूप
पानीकम — मिट्टी सूखने पर
लगाने का समयजून, जुलाई

संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, कसैला, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹75छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

शरपुंखा 30–60 सेमी का बरसाती पौधा है, जिस पर गुलाबी-बैंगनी मटर जैसे फूल और पतली फलियाँ लगती हैं। पत्ता तोड़ने पर किनारा तीर के पंख (शर-पुंख) जैसा कटता है, इसी से नाम पड़ा। आयुर्वेद में इसे 'प्लीहशत्रु' (तिल्ली की बढ़ोतरी का शत्रु) कहा गया है।

पारंपरिक उपयोग

  1. पंचांग का प्रयोग तिल्ली (प्लीहा) और लिवर की बढ़ोतरी में आयुर्वेदिक योगों में।
  2. जड़ का दातून दाँत दर्द और मसूड़ों के लिए लोक-परंपरा में।
  3. त्वचा रोग और घाव पर पत्तों का लेप।
  4. खेत में हरी खाद के रूप में।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
तिक्त (कड़वा), कषाय (कसैला)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला), तीक्ष्ण (तेज़ असर वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
कफ और वात को शांत करती है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

अपने आप उगने वाला पौधा; धूप, सूखी ज़मीन। बरसात में बीज छिड़क दें।

ध्यान दें

गर्भावस्था में न लें।

शब्दावली

पंचांग
पौधे के पाँचों हिस्से — जड़, तना, पत्ते, फूल और फल
प्लीहा
तिल्ली (पेट में बाईं ओर का अंग)
कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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