PARIJATNURSERY & GARDEN

विधारा

Vidhara (Elephant Creeper)

Argyreia nervosa · Convolvulaceae

संस्कृत नाम: वृद्धदारक, आवेगी, जीर्णदारु

लता / बेलविशेष सावधानीनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागजड़ (मुख्य), पत्ते
तासीरगर्म
धूपपूरी धूप
पानीमध्यम — ऊपर की मिट्टी सूखने पर
लगाने का समयजुलाई, अगस्त

संक्षेप में: स्वाद में तीखा-चरपरा, कड़वा, कसैला, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है — यह विशेष सावधानी वाला पौधा है; इसका सेवन केवल वैद्य की देखरेख में करें।

₹100छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

विधारा (समुद्र-शोष) एक बड़ी, तेज़ी से फैलने वाली बेल है, जिसके हाथी के कान जैसे बड़े, दिल के आकार के पत्ते नीचे से रेशमी-सफ़ेद होते हैं और बैंगनी-गुलाबी कीप जैसे फूल आते हैं। संस्कृत नाम 'वृद्ध-दारक' का अर्थ है जो बुढ़ापे को दूर करे। आयुर्वेद में यह जोड़ों के दर्द और बल के लिए प्रसिद्ध रसायन है।

पारंपरिक उपयोग

  1. जड़ का चूर्ण आयुर्वेद में जोड़ों के दर्द, कमर दर्द और गठिया (आमवात) में प्रयोग होता है।
  2. रसायन के रूप में बुढ़ापे की कमज़ोरी और याददाश्त के लिए बताया गया है।
  3. पत्तों को गरम करके सूजन और फोड़ों पर बाँधने की लोक-परंपरा है।
  4. बड़े पत्तों और फूलों के कारण बाड़ और पेड़ों पर सजावटी बेल।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
कटु (तीखा-चरपरा), तिक्त (कड़वा), कषाय (कसैला)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), स्निग्ध (चिकनाई वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
कफ और वात को शांत करता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

धूप, किसी भी मिट्टी में; बहुत बड़ी बेल बनती है, इसलिए मज़बूत पेड़, दीवार या पर्गोला चाहिए। बरसात में लगाएँ।

ध्यान दें

इसके बीज खाने से नशा और मतिभ्रम होता है — बीज बिल्कुल न खाएँ। गर्भावस्था में न लें।

शब्दावली

रसायन
शरीर को ताक़त देने, रोगों से बचाने और बुढ़ापा धीमा करने वाली औषधि
आमवात
जोड़ों में सूजन और दर्द वाला रोग (गठिया जैसा)
कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

इसी तरह के और पौधे