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सत्यानाशी (भड़भाँड़) – Satyanashi (Mexican Poppy)

सत्यानाशी (भड़भाँड़)

Satyanashi (Mexican Poppy)

Argemone mexicana · Papaveraceae (अहिफेन कुल)

संस्कृत नाम: स्वर्णक्षीरी, कटुपर्णी

जड़ी-बूटीविशेष सावधानी
उपयोगी भागकेवल बाहरी उपयोग — पीला दूध, पत्ते
तासीरठंडी

संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, तासीर ठंडी। जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है — यह विशेष सावधानी वाला पौधा है; इसका सेवन केवल वैद्य की देखरेख में करें।

यह पौधा अभी ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है। उपलब्धता की जानकारी के लिए WhatsApp पर संपर्क करें।

परिचय

सत्यानाशी काँटेदार, नीले-हरे पत्तों और चमकीले पीले फूलों वाला खरपतवार है, जिसे तोड़ने पर पीला दूध निकलता है। यह मेक्सिको से आया और अब खेत-सड़क किनारे हर जगह है। इसके बीज सरसों जैसे दिखते हैं, और सरसों तेल में इनकी मिलावट से 'एपिडेमिक ड्रॉप्सी' नाम की गंभीर बीमारी फैलती रही है।

पारंपरिक उपयोग

  1. पीला दूध पुराने समय में मस्सों और दाद पर बाहरी रूप से लगाया जाता था (आँख से दूर)।
  2. आयुर्वेद में शोधित रूप में कुछ त्वचा रोगों में, केवल वैद्य द्वारा।
  3. पहचानना ज़रूरी है ताकि सरसों के खेत और बीज इसके बीजों से मिलावट-मुक्त रहें।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
तिक्त (कड़वा)
तासीर
ठंडी
दोषों पर असर
कफ और पित्त को शांत करती है (केवल बाहरी)।

कैसे लगाएँ और देखभाल

इसे लगाने की ज़रूरत नहीं — यह ज़िद्दी खरपतवार है। सरसों के खेत में दिखे तो बीज बनने से पहले उखाड़ दें।

ध्यान दें

यह पौधा खाने योग्य नहीं है। बीज या उसका तेल खाने से पैरों में सूजन, दिल और आँखों (ग्लूकोमा) पर गंभीर असर होता है। सरसों तेल हमेशा भरोसेमंद जगह से लें।

शब्दावली

शोधित
ख़ास विधि से साफ़ और सुरक्षित किया हुआ (यह काम केवल वैद्य करते हैं)
कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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