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अर्क (मदार / अकौन) – Madar (Aak)

अर्क (मदार / अकौन)

Madar (Aak)

Calotropis gigantea / C. procera · Apocynaceae (अर्क कुल)

संस्कृत नाम: अर्क, अलर्क, मन्दार

जड़ी-बूटीविशेष सावधानीनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागपत्ते, फूल, जड़ की छाल, दूध (केवल चिकित्सक की देखरेख में)
तासीरगर्म
धूपपूरी धूप
पानीकम — मिट्टी सूखने पर
लगाने का समयमार्च, अप्रैल, जुलाई

संक्षेप में: स्वाद में तीखा-चरपरा, कड़वा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है — यह विशेष सावधानी वाला पौधा है; इसका सेवन केवल वैद्य की देखरेख में करें।

₹75छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

मदार (आक, अकौन) मोटे, भूरे-हरे, मखमली पत्तों वाली झाड़ी है, जो सूखी, बंजर ज़मीन पर भी उग जाती है। इसके बैंगनी या सफ़ेद, मुकुट जैसे फूल शिवजी को बहुत प्रिय हैं। पौधा तोड़ने पर गाढ़ा सफ़ेद दूध निकलता है, जो बहुत तेज़ असर वाला होता है।

पारंपरिक उपयोग

  1. गरम किए हुए पत्ते पर सरसों का तेल लगाकर जोड़ों के दर्द और सूजन पर बाँधने की लोक-परंपरा है।
  2. फूल और पत्ते शिव पूजा, विशेषकर सावन और महाशिवरात्रि में चढ़ाए जाते हैं।
  3. आयुर्वेद में शोधित जड़-छाल का प्रयोग खाँसी-दमा और त्वचा रोगों के योगों में, केवल वैद्य द्वारा किया जाता है।
  4. सफ़ेद मदार (श्वेतार्क) की जड़ को पूजा में विशेष माना जाता है।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
कटु (तीखा-चरपरा), तिक्त (कड़वा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला), तीक्ष्ण (तेज़ असर वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
कफ और वात को शांत करता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

पूरी धूप, सूखी, रेतीली ज़मीन; पानी बहुत कम। किसी भी मौसम में बीज या पौधे से लग जाता है। पूजा के लिए घर के बाहर, बच्चों की पहुँच से दूर लगाएँ।

ध्यान दें

यह पौधा खाने योग्य नहीं है। इसका दूध आँख में जाने से आँख को गंभीर नुकसान हो सकता है। अंदरूनी सेवन कभी ख़ुद न करें।

शब्दावली

शोधित
ख़ास विधि से साफ़ और सुरक्षित किया हुआ (यह काम केवल वैद्य करते हैं)
कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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