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तिल – Til (Sesame)

तिल

Til (Sesame)

Sesamum indicum · Pedaliaceae

संस्कृत नाम: तिल, स्नेहफल, होमधान्य

मसाले व बीजनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागबीज, बीज का तेल
तासीरगर्म
धूपपूरी धूप
पानीकम — मिट्टी सूखने पर
लगाने का समयजून, जुलाई

संक्षेप में: स्वाद में मीठा, कड़वा, कसैला, तीखा-चरपरा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹50छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

तिल 1 मीटर तक का सालाना पौधा है, जिस पर सफ़ेद-गुलाबी नली जैसे फूल और फलियों में छोटे सफ़ेद या काले बीज बनते हैं। तिल का तेल आयुर्वेद में सभी तेलों में श्रेष्ठ बताया गया है और ज़्यादातर आयुर्वेदिक तेल इसी में पकाए जाते हैं। मकर संक्रांति पर तिलकुट और तिल के लड्डू बिहार की पहचान हैं।

पारंपरिक उपयोग

  1. तिल तेल की मालिश (अभ्यंग) वात, रूखी त्वचा और जोड़ों के दर्द में।
  2. तिल तेल से कुल्ला (गण्डूष) दाँतों और मसूड़ों के लिए आयुर्वेद में।
  3. तिल-गुड़ के लड्डू सर्दियों में कैल्शियम और ऊर्जा के लिए।
  4. काले तिल पूजा, तर्पण और हवन में।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
मधुर (मीठा), तिक्त (कड़वा), कषाय (कसैला), कटु (तीखा-चरपरा)
गुण (प्रकृति)
गुरु (भारी, देर से पचने वाला), स्निग्ध (चिकनाई वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
वात को विशेष रूप से शांत करता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

बरसात (जून–जुलाई) में बीज बोएँ; धूप, अच्छी निकासी वाली हल्की मिट्टी। 90–100 दिन में फलियाँ पकती हैं।

ध्यान दें

तिल से एलर्जी वाले सावधान रहें। ज़्यादा खाने से गर्मी और दस्त।

शब्दावली

अभ्यंग
पूरे शरीर पर तेल मालिश
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
गण्डूष
तेल या काढ़ा कुछ देर मुँह में भरकर रखना

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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