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नागरमोथा (मोथा) – Nagarmotha

नागरमोथा (मोथा)

Nagarmotha

Cyperus rotundus / Cyperus scariosus · Cyperaceae

संस्कृत नाम: मुस्तक, मुस्ता, भद्रमुस्ता

जड़ी-बूटी
उपयोगी भागकंद (जड़ की गाँठें)
तासीरठंडी

संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, तीखा-चरपरा, कसैला, तासीर ठंडी। जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

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परिचय

नागरमोथा घास जैसा पौधा है, जिसकी जड़ में छोटी, काली, खुशबूदार गाँठें बनती हैं। खेतों में यह ज़िद्दी खरपतवार है, पर आयुर्वेद में 'मुस्ता' पाचन, दस्त और बुखार की बहुत प्रिय औषधि है। इसकी गाँठों से इत्र और अगरबत्ती भी बनती है।

पारंपरिक उपयोग

  1. मुस्ता का चूर्ण या काढ़ा दस्त, अपच और भूख न लगने में पारंपरिक रूप से दिया जाता है।
  2. बुखार में प्यास और जलन कम करने के लिए (षडंग पानीय)।
  3. स्त्रियों के मासिक धर्म के दर्द के आयुर्वेदिक योगों में।
  4. खुशबूदार गाँठें इत्र, उबटन और अगरबत्ती में।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
तिक्त (कड़वा), कटु (तीखा-चरपरा), कषाय (कसैला)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
ठंडी
दोषों पर असर
कफ और पित्त को शांत करता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

बहुत आसानी से उगता और फैलता है — इसे खेत या बगीचे की क्यारी में न लगाएँ, गमले में ही रखें।

शब्दावली

कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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