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निर्गुण्डी – Nirgundi

निर्गुण्डी

Nirgundi

Vitex negundo · Lamiaceae (तुलसी कुल)

संस्कृत नाम: निर्गुण्डी, सिन्दुवार, शेफाली (कुछ ग्रंथों में)

जड़ी-बूटीनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागपत्ते (मुख्य), जड़, बीज, फूल
तासीरगर्म
धूपपूरी धूप
पानीकम — मिट्टी सूखने पर

संक्षेप में: स्वाद में तीखा-चरपरा, कड़वा, कसैला, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹70छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

निर्गुण्डी (सम्हालू) 2–4 मीटर की झाड़ी है, जिसके पत्ते हाथ की उँगलियों की तरह पाँच पत्रकों में बँटे होते हैं और नीचे से सफ़ेद-भूरे होते हैं। इस पर हल्के नीले-बैंगनी फूलों की मंजरियाँ आती हैं। संस्कृत में कहा गया है कि यह शरीर को रोगों से बचाती है; आयुर्वेद में यह दर्द और सूजन की प्रमुख औषधि है।

पारंपरिक उपयोग

  1. पत्तों को पानी में उबालकर उसकी भाप से सेंकना या पत्तों की गरम पोटली से जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत ली जाती है।
  2. निर्गुण्डी तेल कमर दर्द, घुटने के दर्द और मोच में मालिश के लिए प्रसिद्ध है।
  3. पत्तों की भाप सर्दी, बंद नाक और सिरदर्द में ली जाती है।
  4. सूखे पत्ते अनाज के भंडार में रखने से कीड़े दूर रहते हैं।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
कटु (तीखा-चरपरा), तिक्त (कड़वा), कषाय (कसैला)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
कफ और वात को शांत करती है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

पूरी धूप, किसी भी मिट्टी में; सूखा सह लेती है। बरसात में कलम या पौधा लगाएँ। बाड़ के रूप में भी लगा सकते हैं।

ध्यान दें

गर्भावस्था में अंदरूनी सेवन न करें।

शब्दावली

कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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