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बादाम – Almond

बादाम

Almond

Prunus dulcis (असली बादाम) · Rosaceae (गुलाब कुल)

संस्कृत नाम: वाताद, वातवैरी

फलदार
उपयोगी भागबीज (गिरी), तेल
तासीरगर्म
धूपपूरी धूप
पानीमध्यम — ऊपर की मिट्टी सूखने पर

संक्षेप में: स्वाद में मीठा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹90देसी बादाम · छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

नर्सरी में 'देसी बादाम' (Terminalia catappa) मिलता है, जो असली बादाम से अलग पेड़ है।

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परिचय

असली बादाम (वाताद) ठंडे, सूखे पहाड़ी इलाकों (कश्मीर, अफ़ग़ानिस्तान, कैलिफ़ोर्निया) का पेड़ है, जिसके फल के अंदर की गिरी बादाम है। आयुर्वेद में इसे दिमाग़ और शरीर को बल देने वाला मेवा माना गया है। बिहार के मैदान में असली बादाम पर फल नहीं आते; यहाँ 'देसी बादाम' (Terminalia catappa) नाम का अलग छायादार पेड़ उगता है, जिसकी गिरी भी खाई जाती है।

पारंपरिक उपयोग

  1. रात भर भिगोकर छिले हुए बादाम सुबह खाना दिमाग़ और याददाश्त के लिए परंपरा से प्रचलित है।
  2. बादाम दूध (बादाम पीसकर दूध में) कमज़ोरी और दुबलेपन में पौष्टिक पेय है।
  3. बादाम रोगन (तेल) नाक में डालने, सिर और शरीर की मालिश, और बच्चों की मालिश में उपयोग होता है।
  4. त्वचा की रूखापन में बादाम तेल लगाया जाता है।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
मधुर (मीठा)
गुण (प्रकृति)
गुरु (भारी, देर से पचने वाला), स्निग्ध (चिकनाई वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
वात को शांत करता है; पित्त-कफ बढ़ा सकता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

असली बादाम को ठंडी सर्दी चाहिए — बिहार में यह फल नहीं देता। हमारे पास 'देसी बादाम' का पेड़ मिलता है, जो धूप में तेज़ी से बढ़ता है, घनी छाया देता है और जिसके फल की गिरी भी खाई जाती है।

ध्यान दें

कड़वे बादाम (जंगली किस्म) न खाएँ — उनमें हानिकारक तत्व होता है। मेवे से एलर्जी वाले सावधान रहें।

शब्दावली

वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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