
शरीफ़ा (सीताफल)
Sharifa (Custard Apple)
Annona squamosa · Annonaceae
संस्कृत नाम: सीताफल, गण्डगात्र
संक्षेप में: स्वाद में मीठा, तासीर ठंडी। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; जलन, एसिडिटी और गर्मी जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
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परिचय
शरीफ़ा (सीताफल) के हरे, उभरी आँखों जैसे खंडों वाले फल के अंदर मलाई जैसा मीठा सफ़ेद गूदा और काले बीज होते हैं। अक्टूबर–नवंबर में मिलने वाला यह फल ऊर्जा, आयरन और रेशे से भरपूर है। पेड़ छोटा और सूखा सहने वाला होता है।
पारंपरिक उपयोग
- पका शरीफ़ा कमज़ोरी, थकान और दुबलेपन में पौष्टिक, मीठा फल है।
- ठंडक देने वाला होने से पित्त की जलन में उपयोगी माना गया है।
- पत्तों का लेप लोक-परंपरा में फोड़ों पर और पत्ते पीसकर सिर में जूँ भगाने के लिए लगाए जाते हैं।
- बीजों का चूर्ण पारंपरिक रूप से फसलों पर कीटनाशक के रूप में।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- मधुर (मीठा)
- गुण (प्रकृति)
- गुरु (भारी, देर से पचने वाला)
- तासीर
- ठंडी
- दोषों पर असर
- वात और पित्त को शांत करता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, किसी भी मिट्टी में; सूखा सह लेता है। बरसात में लगाएँ; 3–4 साल में फल। जलभराव से बचाएँ।
ध्यान दें
बीज खाने योग्य नहीं हैं — बीज न तोड़ें, न खाएँ और इसका चूर्ण आँखों से दूर रखें।
शब्दावली
- पित्त
- शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





