
बेर
Ber (Jujube)
Ziziphus mauritiana · Rhamnaceae
संस्कृत नाम: बदर, कोल, कर्कन्धु
संक्षेप में: स्वाद में मीठा, खट्टा, तासीर ठंडी। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; जलन, एसिडिटी और गर्मी जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क
परिचय
बेर काँटेदार, सूखा सहने वाला पेड़ है, जो सर्दियों के अंत (जनवरी–मार्च) में मीठे-खट्टे फलों से लद जाता है। शबरी के बेर की कथा से यह फल भक्ति का प्रतीक है, और बसंत पंचमी व शिवरात्रि पर बेर चढ़ाए जाते हैं। थाई एप्पल बेर जैसी नई किस्में सेब जितने बड़े, मीठे फल देती हैं।
पारंपरिक उपयोग
- पका बेर पौष्टिक, विटामिन C वाला फल है और गर्मी-प्यास में ठंडक देता है।
- बीज की गिरी आयुर्वेद में नींद और प्यास में उपयोग होती है।
- पत्तों का लेप फोड़े-फुंसी और बालों की रूसी में लोक-परंपरा में लगाया जाता है।
- सूखे बेर का चूर्ण और चटनी पाचन के लिए।
आयुर्वेदिक गुण
- गुण
- पका फल — रस: मधुर (मीठा), अम्ल (खट्टा) · गुण: गुरु (भारी, देर से पचने वाला), स्निग्ध (चिकनाई वाला) · तासीर: ठंडी
- दोषों पर असर
- वात और पित्त को शांत करता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, किसी भी मिट्टी में — खारी और सूखी ज़मीन भी। बरसात या फरवरी–मार्च में कलमी पौधा लगाएँ; एक साल में ही फल देने लगता है। हर साल मई में छँटाई करें।
ध्यान दें
कच्चे बेर ज़्यादा खाने से गले में ख़राश और खाँसी हो सकती है।
शब्दावली
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
- पित्त
- शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





