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बाकुची (बावची) – Bakuchi (Babchi)

बाकुची (बावची)

Bakuchi (Babchi)

Psoralea corylifolia (Cullen corylifolium) · Fabaceae (शिम्बी कुल)

संस्कृत नाम: बाकुची, सोमराजी, अवल्गुज

जड़ी-बूटीविशेष सावधानीनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागबीज (मुख्य), बीज का तेल
तासीरगर्म
धूपपूरी धूप
पानीकम — मिट्टी सूखने पर
लगाने का समयफ़रवरी, सितंबर

संक्षेप में: स्वाद में तीखा-चरपरा, कड़वा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है — यह विशेष सावधानी वाला पौधा है; इसका सेवन केवल वैद्य की देखरेख में करें।

₹75छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

बाकुची 60–120 सेमी का सालाना पौधा है, जिस पर बैंगनी फूलों की घनी बालियाँ और काले, खुशबूदार बीज बनते हैं। आयुर्वेद में यह सफ़ेद दाग़ (श्वित्र) की सबसे प्रसिद्ध औषधि है। इसके बीजों में 'सोरालेन' होता है, जो त्वचा को धूप के प्रति संवेदनशील बनाकर रंग लौटाने में मदद करता है।

पारंपरिक उपयोग

  1. बाकुची तेल या लेप सफ़ेद दाग़ पर लगाकर हल्की धूप लेने की पद्धति आयुर्वेद में वैद्य की देखरेख में अपनाई जाती है।
  2. दाद, खुजली और त्वचा रोगों के आयुर्वेदिक योगों में।
  3. इसका तत्व 'बाकुचिओल' आजकल प्राकृतिक स्किन-केयर में इस्तेमाल होता है।
  4. बीज पेट के कीड़ों में भी बताए गए हैं।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
कटु (तीखा-चरपरा), तिक्त (कड़वा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
कफ और वात को शांत करती है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

धूप, सूखी, अच्छी निकासी वाली मिट्टी। बरसात के बाद (सितंबर) या फरवरी में बीज बोएँ।

ध्यान दें

त्वचा पर लगाकर ज़्यादा धूप लेने से गंभीर जलन और छाले हो सकते हैं — केवल वैद्य/त्वचा विशेषज्ञ की सलाह से। अंदरूनी सेवन से लिवर पर असर हो सकता है; गर्भावस्था में न लें।

शब्दावली

श्वित्र
सफ़ेद दाग़
कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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